कांकेर में सरेआम हत्या:तीन सौ ग्रामीणों के सामने लाल सलाम के नारे लगाते पूर्व सरपंच को मारी गोली

जिम्मेदारी लेने नहीं फेंका पर्चा इसलिए नक्सली वारदात होने पर संदेह

सोमवार को ग्राम मदले में देवी पूजा कार्यक्रम में पहुंचे मंडागांव के पूर्व सरपंच घस्सुराम उसेंडी की अज्ञात लोगों ने गोली मार हत्या कर दी। हत्यारे दिन दहाड़े तीन सौ से अधिक लोगों के बीच पहुंचे और पूर्व सरपंच की हत्या कर दी। गोली चलने की दहशत इतनी थी कि ग्रामीणों की भारी भीड़ होने के बावजूद वे हत्यारों को रोकने हिम्मत जुटा नहीं पाए। गोली मारने के बाद हत्यारे भीड़ को चीरते हुए तेजी से पहाड़ी की ओर भागते हुए लाल सलाम का नारा लगा गायब हो गए। हत्या हूबहू नक्सलियों के तर्ज पर की गई लेकिन नक्सलियों की तरह हत्या की जिम्मेदारी लेने व कारण बताने पर्चे नहीं फेंकने से मामला संदेहास्पद हो गया है। फिलहाल मामले में पुलिस ने जांच पड़ताल शुरू कर दी है। जांच सभी एंगल से की जा रही है। मंडागांव के पूर्व सरपंच घस्सुराम उसेंडी अपने परिवार के साथ सोमवार को मदले गांव में किनार खुटा देवस्थल पर नवाखाई को लेकर आयोजित देवी पूजा कार्यक्रम में पहुंचे थे। यहां आसपास के 40 से अधिक गांव के 300 ग्रामीण भी पहुंचे थे। सभी पूजा पाठ में शामिल थे। इसी दौरान दोपहर 2 बजे भीड़ में से मुंह में कपड़ा बांधे तीन लोग घस्सुराम के करीब पहुंचे। मौके पर घस्सुराम की पत्नी व परिवार के अन्य लोग भी थे। सबके सामने एक नकाबपोश ने घस्सुराम के पीठ में पिस्टल टिका गोली चला दी जो उसके सीने को चीरते आरपार हो गई। घस्सुराम वहीं गिर पड़ा। गोली चलने की आवाज से भगदड़ मच गई। गोली चलाते ही तीनों वहां से बाहर निकल लाल सलाम का नारा लगा झंडी डोंगरी की ओर भाग गए। परिवार के लोग घस्सुराम को वाहन में डाल बड़गांव अस्पताल पहुंचे जहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

रिश्तेदार की हत्या कर दी थी चेतावनी
पूर्व सरपंच पिछले तीन साल से नक्सलियों के टारगेट में थे। नक्सली कई बार घस्सुराम के खिलाफ पर्चे फेंक चुके हैं। डेढ़ साल पहले मेंड्रा में नक्सलियों ने घस्सुराम के रिश्तेदार गज्जूराम आंचला की हत्या की थी जहां पर्चे फेंक घस्सुराम को भी चेतावनी दी थी। जब मंडागांव में बीएसएफ कैंप खोला गया तथा इलाके में माईंस चालू हुआ तब से नक्सली घस्सुराम से नाराज थे। कैंप व माईंस के लिए नक्सली घस्सुराम को ही जिम्मेदार मान रहे थे।

6 महीने पहले ऐसे ही पूर्व जनपद सदस्य की हुई हत्या
घस्सुराम की हत्या की तरह ही 6 माह पूर्व 29 फरवरी को भाजपा नेता व पूर्व जनपद सदस्य रमेश गावड़े की दिनदहाड़े निवासी पर गोली मार हत्या की गई थी। तब भी दो युवक पहुंचे थे और गोली मार जंगल की ओर भागे थे। रमेश गावड़े भी नक्सलियों के निशाने पर था। इस मामले में भी नक्सलियों ने हत्या के पूर्व पर्चे फेंके थे लेकिन हत्या के बाद पर्चे नहीं फेंकने से घटना संदेहास्पद थी। घटना के पांच दिन बाद नक्सलियों ने साप्ताहिक बजार में पर्चे फेंक हत्या की जिम्मेदारी ली थी।

दो किमी दूर कैंप फिर भी भनक नहीं लगी
घटनास्थल ग्राम मदले से महज 2 किमी दूर पर बड़े झाड़कट्टा में बीएसएफ कैंप है। इसके बावजूद हत्यारे दिनदहाड़े यहां पहुंच हत्या कर फरार हो गए। हत्यारों के यहां जुटने तक की खबर पुलिस को नहीं लगी जबकि घस्सुराम का हत्यारे पीछा कर रहे थे। आशंका है पूर्व सरपंच के आने की पुख्ता जानकारी हत्यारों को थी जिसके चलते वे पूरी प्लानिंग के साथ पहुंचे थे।

25 साल तक परिवार करता रहा सरपंची
घस्सुराम उसेंडी इलाके की राजनिति में जाना पहचाना नाम था। उसेंडी परिवार 25 सालों तक गांव में सरपंच पद पर कब्जा जमाए हुए था। 1993 में जब पहली बार पंचायती राज शुरू हुआ तब घस्सुराम के पिता झकहाराम उसेंडी सरपंच बने। इसके बाद से घस्सुराम व उसकी पत्नी सरपंच बनते रहे। इस साल पहली बार उसकी पत्नी सरपंच चुनाव हार गई।

बेटियां नेशनल खिलाड़ी : घस्सुराम के 9 बेटी व दो बेटे हैं। एक बेटा नोहरसिंह उसेंडी राजनिति में सक्रिय है जो कोयलीबेड़ा जनपद अध्यक्ष रह चुका है। मृतक की दो बेटियां खोखो व कबड्डी नेशनल खिलाड़ी हैं जो वर्तमान में बिलासपुर में रह रही हंै।

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