जीएसटी पर भड़के वाणिज्य मंत्री:टीएस सिंहदेव बोले- आरबीआई से कर्ज के नाम पर केंद्र सरकार बोझ डाल रही, महामारी में ऐसा करना क्रूरता; 5 राज्यों के वित्तमंत्रियों को स्वीकार नहीं प्रस्ताव

जीएसटी क्षतिपूर्ति मामले को लेकर छत्तीसगढ़ और केंद्र के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। वाणिज्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा, आरबीआई से कर्ज के नाम पर केंद्र सरकार राज्यों के ऊपर बोझ डाल रही है। महामारी में ऐसा करना क्रूरता है। 
  • सिंहदेव ने कहा- जीएसटी क्षतिपूर्ति राज्यों का अधिकार, केंद्र सरकार ने राज्यों से करार को तोड़ा है
  • वाणिज्य मंत्री ने पंजाब, दिल्ली, केरल, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्रियों के साथ बैठक की

जीएसटी क्षतिपूर्ति मामले को लेकर छत्तीसगढ़ और केंद्र के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखने के अगले ही दिन छत्तीसगढ़ के वाणिज्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। सिंहदेव ने कहा, आरबीआई से कर्ज के नाम पर केंद्र सरकार राज्यों के ऊपर बोझ डाल रही है। महामारी में ऐसा करना क्रूरता है।

वाणिज्य मंत्री सिंहदेव ने मंगलवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के भेजे पत्र को रि-ट्वीट करते हुए लिखा, जीएसटी क्षतिपूर्ति राज्यों का अधिकार है। इसकी क्षतिपूर्ति की जगह विकल्प भेजना केंद्र सरकार ने ना सिर्फ अपने और राज्य सरकारों के बीच के करार को तोड़ा है, बल्कि सहकारी संघवाद पर भी भीषण प्रहार किया है। उन्होंने लिखा, महामारी के इस काल में ऐसा करना और भी क्रूर है।


सिंहदेव ने कहा- केंद्र के दोनों प्रस्तावों से राज्य सहमत नहीं
सिंहदेव ने बताया कि सोमवार देर शाम उनकी पंजाब, दिल्ली, केरल, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्रियों के साथ बैठक हुई थी। सभी राज्यों ने सर्वसम्मति से केंद्र सरकार के दोनों प्रस्तावों (जीएसटी सेस कमी और लोन) को अस्वीकार कर दिया है। साथ ही निर्णय लिया गया है कि केंद्र सरकार को राज्यों के लिए यह संवैधानिक दायित्व नहीं सौंपना चाहिए।

ये कमी 'एक्ट ऑफ गॉड' नहीं, जैसा केंद्र सरकार सुझाव दे रही
उन्होंने बताया कि राज्यों के बीच इस बात पर सहमति बनी थी कि केंद्र को कमी को पूरा करना चाहिए। महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल खुद के एजेंडे को आगे बढ़ने से बेहतर है कि जीएसटी परिषद में आम सहमति के माध्यम से इसे आगे बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह कमी 'एक्ट ऑफ गॉड' नहीं है, जैसा कि केंद्र सरकार सुझाव दे रही है। कहा, छत्तीसगढ़ में सालाना 38-40% की कमी है।

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