कोरोना से अपनों को खो चुके परिवारों की अपील:कोरोना हंसती-खेलती दुनिया को एक पल में तबाह कर देगा; जानिए हमारा दर्द, आप तो बस बचिए

दुर्ग के सोनी परिवार में 16 लोगों की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई, जिसके बाद सभी घर में ही अलग-अलग कमरों में रह रहे हैं।

कोरोना से छत्तीसगढ़ में अब तक ढाई सौ से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं, वहीं पिछले एक सप्ताह से रोजाना लगभग हजार मरीज मिल रहे हैं। हमने उन लोगों की तकलीफ जानने की कोशिश की जिन्होंने इससे अपनों को खो दिया, ये सिर्फ उदाहरण हैं, वास्तव में तकलीफों की हजारों दास्तां हैं, ये सभी कह रहे कि हमारी तकलीफ सुनकर सावधान रहिए, बचिए।

रायपुर
बूढ़े मां-बाप घर में अकेले और बेटा अस्पताल में
प्रमोद साहू | 
राजधानी के मोवा में रहने वाले 35 साल के एक अधिकारी (परिवार ने नाम न छापने का अनुरोध किया) को शुक्रवार से बुखार आ रहा था। घर में उनके बूढ़े माता पिता हैं। अधिकारी ने रविवार की सुबह 11 बजे निजी लैब में जाकर टेस्ट कराया। सोमवार को रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। तबसे पूरा घर परेशान है। माता-पिता बुजुर्ग हैं, डर के साए में है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दोपहर 1 बजे कॉल करके रिपोर्ट के बारे में बताया और हिदायत दी कि अलग कमरे में रहें। उन्हें कहा गया कि टीम उन्हें लेने आएगी, शाम पांच बजे तक इंतजार किया, लेकिन कोई नहीं आया। परिजन खुद ही क्वारेंटाइन थे, लेकिन बेटे की चिंता थी। लिहाजा 104 में डायल किया। आश्वासन मिला कि टीम आ रही है। इधर अधिकारी की तबीयत भी बिगड़ने लगी थी। लेकिन अगले दिन दोपहर 2 बजे तक कोई नहीं आया। तब वे खुद की गाड़ी से अस्पताल पहुंचे। इधर, घर में सन्नाटा छा गया। सभी तनाव में थे। घर में दोनों बुजुर्गों का सैंपल अभी तक नहीं लिया गया। लिहाजा बुधवार को जांच कराने का फैसला किया है। अब अधिकारी अपने माता-पिता से हर एक दो घंटे में वीडियो कॉल से बातचीत कर रहे हैं, दवाई और खाने के बारे में पूछ रहे हैं। बूढ़े माता पिता को बेटे की चिंता है और बेटे को माता पिता की। छोटी मोटी जरूरतों के लिए भी माता पिता को दूसरों पर निर्भर होना पड़ रहा है। पिता डर के कारण बाहर भी नहीं जा रहे।

भिलाई-दुर्ग
20 लोगों का परिवार, 16 को कोरोना, एक माह से कारोबार बंद अब डर के साए में सिर्फ चार लोगों पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी
देवीलाल साहू |
 दुर्ग के सोनी परिवार में 20 सदस्य हैं। 16 लोग पाॅजिटिव आ गए और ये एक से 16 कैसे हुए, पता भी नहीं चला। दरअसल परिवार के सत्यनाराण सोनी और उनके भाई राजेश सोनी रायपुर में किसी को देखने हॉस्पिटल आए थे। यहां से जब वे घर लौटे, तो दो दिन बाद बुखार आने लगा। सांस लेने में दिक्कतें महसूस हुई। डॉक्टर ने कहा कि कोरोना के लक्षण हैं और वे पॉजिटिव आ गए। इसके बाद पूरे परिवार का टेस्ट कराया, ज्यादातर लोग पाॅजिटिव आ गए। इसका असर ये हुआ कि पुश्तैनी कारोबार तहस-नहस हुआ जा रहा है। राजेश कहते हैं कि ज्वैलरी की सात दुकानें हैं और सब एक महीने से बंद है। परिवार में हम एक दूसरे को सहारा तक नहीं दे पा रहे। खाना भी एक दूसरे को देना होता है, तो दूर से देते हैं। बच्चों को अपना स्नेह नहीं दे पा रहे। हमने तो यहां तक महसूस किया कि पड़ोसी, दोस्त, रिश्तेदार सब दरवाज़े बंद कर लेते हैं ऐसे समय में। हम इस बात को समझ सकते हैं कि ये उनकी मजबूरी है, लेकिन दिल कचोटता है। मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन बेहद जरूरी है। एक दो दिन अस्पताल में रहने के बाद सब घर पर ही क्वारिन्टाइन हैं, लेकिन घर पर भी सब डरे हुए हैं। किसी को भी हल्का सा बुखार आता है तो पूरा परिवार सहम जाता है। किसी को छींक आती है, तो ऐसा लगता है कि एंबुलेंस बुलवा लें। घर में सिर्फ चार लोग ही ठीक हैं, जिनमें दो महिलाएं हैं और दो पुरुष। ये ही सबके खाने-पीने का इंतजाम कर रहे हैं खुद को बचाते हुए। आज हालात यह हैं कि हर व्यक्ति अलग अलग कमरे में रहता है, मास्क, ग्लव्स पहनते हैं। थाली, गिलास सबकुछ अलग है। बिस्तर, चादर सबकी सफाई हर व्यक्ति खुद कर रहा है। बुखार, शुगर, बीपी सब खुद ही नाप रहे हैं।

बिलासपुर
पिता ने दुनिया छोड़ी; मां, पत्नी व बेटी अस्पताल में

राजू शर्मा | यह दास्तां बिलासपुर के गोंडपारा में रहने वाले सलूजा परिवार की है। प्रिंस घर में अकेले हैं। थोड़ी-थोड़ी देर में सिसकने लगता हैं। 37 साल के प्रिंस की पत्नी, बेटी और मां इस वक्त बिलासपुर के अस्पताल में कोरोना से लड़ रहे हैं। 20 अगस्त को कोरोना से लड़ते हुए ही पिता दुनिया छोड़ गए। दो हफ्ते पहले तक सबकुछ ठीक था। घर-परिवार में खुशियां थी। माता-पिता घर में टेलीविज़न देखा करते, खाने-पीने की चीज़ों की फरमाइशें होती, बेटी दादा-दादी के साथ खेला करती और पत्नी भी पूरे परिवार की खुशियों में शरीक होती। लेकिन एक पल में ये सब कुछ बदल गया। वे बाज़ार गए थे, सब्जी लेने। आने के बाद बुखार होने लगा। संदेह हुआ तो कोरोना टेस्ट कराया, पॉजिटिव आए। काफी जद्दोजहद करनी पड़ी, तब जाकर 15 अगस्त को एडमिट हुए। 67 साल के गुरुवचन सिंह सलूजा से प्रिंस रोज़ फोन पर बात करते थे। बताते थे कि वहां कोई देखने नहीं आता। कोई बात नहीं करता। घुटन होती है। परिवार का टेस्ट भी लिया गया। पता चला कि पत्नी, मां और बेटी तीनों पॉजिटिव हैं। उन्हें भी बिलासपुर के ओपन यूनिवर्सिटी में भर्ती कराया गया। इस बीच 20 अगस्त को प्रिंस के पिता का निधन हो गया। आखिरी दौर में पिता ने प्रिंस को यही बताया कि वो सांस नहीं ले पा रहे, बहुत तकलीफ हो रही, कोई देख नहीं रहा। ये बताते हुए प्रिंस रो पड़ते हैं।

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