नाराजगी:संघ प्रमुख आए रायपुर, वरिष्ठ भाजपा नेता का फूटा गुस्सा,परिश्रम के बजाय परिक्रमा को महत्व इसलिए भाजपा का पतन : उपासने

आरएसएस के सर संघचालक डॉ. मोहन भागवत राजधानी प्रवास पर हैं। ऐसे में भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने ने पार्टी की वर्तमान स्थिति को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उपासने ने एक वीडियो जारी कर कहा है कि 15 साल की सत्ता से पार्टी बहुत दुर्गुण आए हैं। जनता जो चाहती है, जनता जो देखती है कि हम क्या थे, क्या हो गए। ये जनता बारीकी से हम पर नजर रखती है। जब नजर रखती है तो निश्चित रूप से उसका दुष्परिणाम पार्टी को भुगतना पड़ता है। इससे किसी एक को नहीं, बल्कि सिद्धांतों, विचारधारा और वैचारिक आंदोलन को ठेस पहुंचती है। उपासने ने कहा कि कार्यकर्ता पद का नहीं, स्नेह का भूखा है। उन्होंने आह्वान किया कि मुझे पद मिले या न मिले, मैं लक्ष्य के लिए समर्पित हूं, यह भाव लेकर चलें। निश्चित रूप से कार्यकर्ता-नेता अलग नहीं हैं। अटल-आडवाणी व जोशी के आदर्शों को याद कर काम प्रारंभ किया तो जनता फिर से भाजपा को सत्ता में लाने के लिए तैयार बैठी है।

देश में जो काम हो रहे हैं, वे यहां भी चाह रहे हैं। उपासने ने कहा कि जनसंघ की पहचान की थी कि कार्यकर्ता कभी पद के लिए दौड़ता नहीं था। संगठन मंत्री निष्ठा से परिश्रम करने वाले कार्यकर्ताओं पर नजर रखते थे। जब परिश्रम के बजाय परिक्रमा को महत्व मिलता है, उस दिन से पतन की शुरुआत हो जाती है। यह वीडियो वायरल होने के बाद कार्यकर्ताओं ने भी वर्तमान नेतृत्व पर निशाना साधा है और बदलाव की मांग की है। जनसंघ से जुड़े और आपातकाल के समय जेल जाने वाले उपासने ने ऐसे समय में यह वीडियो जारी किया है, जब पूर्व पीएम भारत रत्न अटलबिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि भी है। अटल, आडवाणी और जोशी को याद करते हुए उपासने ने उनके पदचिह्नों पर चलने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा को सत्ता विरासत में नहीं मिली है, बल्कि लाखों-हजारों कार्यकर्ताओं के परिश्रम और बलिदान से मिली है। भाजपा का उद्देश्य सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि व्यापक रूप से समाज में परिवर्तन लाना है। इसलिए भाजपा का ध्येय वाक्य पार्टी विद डिफरेंस है।

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