विधानसभा का मानसून सत्र:धार ढूंढता नजर आया विपक्ष, हमलावर रही सरकार

छ त्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के चार दिनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक अपने पुराने दिनों को पाने की कोशिश में दिखे। हंगामा, नारे और आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति में विपक्ष अपनी धार ढूंढता नजर आया। वहीं सरकार हमलावर अंदाज में विपक्ष को शांत करती नजर आई। सत्र का पहला दिन भले ही दिवंगतों को श्रद्धांजलि देने में चला गया लेकिन इस दिन भी प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी के लिए पक्ष और विपक्ष के सदस्यों की जो भावनाएं सामने आईं, उसने यह बता दिया कि जोगी का कद कितना बड़ा था। सदन में दूसरे दिन देश और प्रदेश में तेजी से बढ़ते कोरोना महामारी को लेकर काम रोको प्रस्ताव पर हुई चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों ने पूरे समय सरकार को निशाने पर रखा। पूर्व सीएम डाॅ. रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक, बृजमोहन अग्रवाल, अजय चंद्राकर के साथ जोगी कांग्रेस के नेता धर्मजीत सिंह ने सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। भाजपा विधायकों ने 13 मंत्रियों को योद्धा कहे जाने पर भी जमकर तंज कसा। सीएम भूपेश बघेल ने जवाब देते हुए सरकार के कामों का उल्लेख कर विपक्ष को निरुत्तर करने का प्रयास किया। संसदीय सचिवों की नियुक्ति को लेकर विपक्ष ने सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की। सरकार हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए उनकी नियुक्ति और सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने का हवाला देते हुए बचती नजर आई। वहीं सदन में सड़कों की खराब स्थिति, हाथियों की मौत पर अंतरराष्ट्रीय तस्करी का आरोप लगाकर भाजपा विधायकों ने सनसनी फैला दी। वनमंत्री मोहम्मद अकबर ने जिस सफाई से जवाब दिया उससे विपक्ष संतुष्ट नजर आया। अनुपूरक बजट पर रमन सिंह ने तो यहां तक कह दिया कि सरकार के बजट की हालत कोमा में गए मरीज जैसी हो गई है। लेकिन सीएम भूपेश ने प्रदेश के किसान, आदिवासी और महिलाओं को अपनी प्राथमिकता बताते हुए यह कहा कि कर्ज लेना पड़े तो लेंगे लेकिन किसानों को भूखा नहीं मरने देंगे। इस तरह उन्होंने पिछली और वर्तमान सरकार के बीच अंतर पैदा करने की अपनी कोशिश को दो कदम और आगे बढ़ा दिया। इसी तरह अंतिम दिन खाद की किल्लत और कालाबाजारी पर विपक्ष ने कड़े तेवर दिखाए। रेत खदानों में अवैध परिवहन और रेत की मनमानी कीमतों को लेकर भी विपक्ष ने जमकर तीर चलाए। वहीं सरकार ने भाजपा विधायकों के विरोध के बाद भी निजी स्कूलों की मनमानी फीस से परेशान पालकों को बड़ी राहत देते हुए सालों से लंबित फीस विनियामक आयोग के लिए न सिर्फ नया कानून बनाया बल्कि इसमें कड़े प्रावधान भी किए गए हैं। इसी तरह पूर्व और वर्तमान विधायकों के लिए पेंशन भत्ता बढ़ाकर उन्हें भी संतुष्ट करने की कोशिश की गई।

इसके अलावा एससी, एसटी और ओबीसी आयोग में सदस्यों की संख्या बढ़ाने का विधेयक लाकर सरकार ने अपने कार्यकर्ताओं को एडजस्ट करने का तरीका भी खोज निकाला। स्पीकर डॉ. चरणदास महंत ने कोरोना काल में मानसून सत्र सफलतापूर्वक संपन्न होने को विधायिका की दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचायक और अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय बताया।

कोरोना संक्रमण के बीच चार दिन के सत्र में 24 घंटे 30 मिनट तक चर्चा हुई और विनियोग विधेयक समेत 12 विधेयक भी प्रस्तुत किए गए। सत्र के दौरान सभी सदस्यों के टेम्प्रेचर और कोरोना जांच की व्यवस्था की गई थी। सदन के भीतर ग्लास का पार्टीशन कर फिजिकल डिस्टेंसिंग का भी पालन कराया गया।

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