छत्तीसगढ़ का अनुपूरक बजट:मुख्यमंत्री बघेल ने कहा- कर्ज लेना पड़े तो ले लेंगे, पर किसानों को तकलीफ नहीं होने देंगे, कोरोना से निपटने के लिए 978 करोड़ का प्रावधान

तस्वीर विधानसभा की है। मुख्यमंत्री ने अपनी बात-चीत में सरकार का विजन भी साफ किया उन्होंने कहा बिल्डिंग से नहीं हमारे विकास की कलप्ना आदिवासी, किसान और महिलाओं की जिंदगी में बदलाव लाने से जुड़ी है।
  • प्रदेश में कुल बजट का आकार 1 लाख 6 हजार 714 करोड़ रुपए
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था, आपदा राहत, पेयजल के लिए 1900 करोड़ रुपए का प्रावधान

छत्तीसगढ़ की विधानसभा में गुरुवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य सरकार के वित्तीय वर्ष 2020-21 के अनुपूरक बजट पर चर्चा की। इस पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि हमने विपरीत परिस्थितियों में भी किसानों की अर्थव्यवस्था को बिगड़ने नहीं दिया। यदि हमें कर्ज लेना पड़ेगा तो कर्ज लेंगे, लेकिन किसानों को कोई तकलीफ नहीं होने देंगे। सीएम बघेल ने कहा कि आपकी नजर में विकास का पैमाना सड़कें और बिल्डिंग हो सकती हैं लेकिन हमारी नजर में विकास का पैमाना किसान, आदिवासियों और महिलाओं का उत्थान है। हमारी वचनबद्धता किसानों के प्रति है।

3807 करोड़ की अनुपूरक मांगें

  • विधानसभा में चर्चा के बाद 3807 करोड़ 46 लाख रुपए की प्रथम अनुपूरक मांग पारित कर दी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को धान का 25 सौ रुपए प्रति क्विंटल मूल्य दिलाने के लिए ही हम राजीव गांधी किसान न्याय योजना लेकर आए। इसमें दो किस्तों का भुगतान किसानों को कर दिया गया है, और शेष किस्तों का भुगतान भी किया जाएगा। हमारी सरकार द्वारा चलाए गए मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान से 6 से 8 माह में ही कुपोषित बच्चों की संख्या में 13 प्रतिशत की कमी आई है।
  • छत्तीसगढ़ राज्य का गठन प्रदेश के 2.80 करोड़ लोगों के लिए हुआ है। हम उनके लिए कर्ज ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉकडाउन में हमने लोगों को काम दिया। मनरेगा में 26 लाख लोगों को काम दिया गया। राजीव गांधी किसान योजना का लाभ प्रदेश के 19 लाख किसानों को दिया जा रहा है। लघु वनोपजों के संग्रहण के माध्यम से 12 से 13 लाख वनवासी परिवारों को रोजगार और आय के साधन उपलब्ध कराए गए हैं। यही कारण है कि लॉकडाउन में भी छत्तीसगढ़ में व्यापार और उद्योग के पहिए चलते रहे।
  • मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लॉकडाउन के दौरान जनधन खातों में 500 रुपए और किसान निधि योजना में 500 रुपए की राशि दी गई, जबकि राज्य सरकार द्वारा प्रारंभ की गई गोबर खरीदी की गोधन योजना में पहला भुगतान 1 करोड़ 65 लाख रुपए और दूसरा भुगतान 4 करोड़ 50 लाख रुपए का किया गया। इसमें गोबर बेचने वाले हर व्यक्ति को औसतन 800 रुपए मिले। इस योजना के लाभान्वित लोगों में 71 प्रतिशत लोग भूमिहीन हैं।
  • राज्य को केंद्र सरकार से जीएसटी का 2828 करोड़ रुपए अभी तक नहीं मिले हैं। यदि यह राशि मिल जाती तो छत्तीसगढ़ को कर्ज लेने की जरूरत ही नहीं पड़ती। राज्य सरकार के पहले अनुपूरक बजट में कोरोना की आपदा से निपटने के लिए 978 करोड़ रुपए, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, आपदा राहत और पेयजल के लिए 1 हजार 900 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। प्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार के लिए 30 डेडिकेटेड कोविड अस्पताल स्थापित किए गए हैं, जिनमें 3384 बिस्तर उपलब्ध हैं। इसी तरह 178 डेडिकेटेड कोविड केयर सेंटर में 21 हजार 107 बिस्तरों की व्यवस्था की गई है। शासकीय अस्पतालों में कोरोना मरीजों का मुफ्त में इलाज किया जा रहा है। प्राइवेट अस्पतालों में भी व्यवस्था की गई है।
  • मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रथम अनुपूरक में कांकेर, महासमुंद और कोरबा में मेडिकल कालेजों के लिए 53.29 करोड़ रुपए का भी प्रावधान किया गया है। इनमें से प्रत्येक महाविद्यालय की स्थापना के लिए 325 करोड़ रुपए की योजना स्वीकृत की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा राजधानी के पास माता कौशल्या मंदिर का निर्माण और रामवन गमन पथ विकसित किया जाएगा। पूर्व की सरकार ने 15 साल इनकी सुध तक नहीं ली। इन स्थलों के मूल स्वरूप को यथावत रखते हुए पर्यटकों के लिए सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोरोना संकट की घड़ी में छत्तीसगढ़ की जनता चट्टान की तरह खड़ी रही, उन्हें मैं शत-शत नमन करता हूं। उन्होंने कहा कि कोरोना से बचाव में ही सुरक्षा है, सभी लोगों को फिजिकल डिस्टेंस, सेनेटाइजर और मास्क का उपयोग सुरक्षा के लिए करना चाहिए।

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