कोरोना का असर:बाजारों में आधे कर्मचारी कम, अस्पतालों में 60% स्टाफ, सरकारी दफ्तरों में तिहाई कर्मी

अस्पतालों में कोरोना संक्रमण से स्टाफ कम, दफ्तरों में रोटेशन लागू, बाजारों में जरूरत के कर्मचारी ही बचे

राजधानी में कोरोना संक्रमण तेजी से फैला है और सरकारी-निजी दफ्तरों से लेकर बाजारों और अस्पतालों पर इसका असर नजर आने लगा है। प्रदेश-राजधानी के सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों की संख्या रोटेशन की वजह से घटकर 30 फीसदी रह गई है। बाजारों ने आधे कर्मचारी घटा दिए हैं, क्योंकि कारोबारियों का दावा है कि इतना उनका कारोबार नहीं है। सभी बड़े सरकारी और निजी अस्पताल जहां कोविड मरीजों का आना-जाना है, वहां डाक्टर-स्टाफ मिलाकर बमुश्किल 40 फीसदी कर्मचारी ही बच गए हैं। कोरोना से जुड़े सरकारी अफसरों का मानना है कि सरकारी-निजी सेक्टर से अब तक 400 से ज्यादा डाक्टर और स्टाफ कोरोना पाजिटिव होने की वजह से तथा सैकड़ों कर्मचारी प्राइमरी कांटेक्ट की वजह से आइसोलेशन में चले गए हैं। राजधानी के कलेक्टोरेट, तहसील, निगम मुख्यालय, 10 जोन दफ्तरों समेत 50 से ज्यादा सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों की उपस्थिति लगभग एक-तिहाई है। ‌कई विभाग प्रमुखों ने भास्कर को बताया कि इन दफ्तरों में लोगों की आवाजाही भी आधी से कम है। इसीलिए ऑनलाइन आवेदन और उनके निपटारे पर जोर दिया जा रहा है। निगम मुख्यालय और तहसील में आवेदन घटकर 50 फीसदी रह गए हैं। इसकी वजह यह भी है कि हर विभाग के अधिकांश कर्मचारियों को कोविड-19 का काम सौंप दिया गया है। अफसरों का दावा है कि इस कमी की वजह से काम प्रभावित नहीं हुआ है, लेकिन हालात ये हैं कि अब वही काम हो रहे हैं जो जरूरी हों।

एक-तिहाई अमले के साथ काम, प्रशासन-रोजगार पर ही फोकस
प्रदेश के प्रशासनिक मुख्यालय मंत्रालय और सचिवालय ही नहीं, पुलिस मुख्यालय में भी रोटेशन की वजह से स्टाफ एक-तिहाई रह गया है। आम लोगों की इन दफ्तरों में आवाजाही पर रोक है, इसलिए विभागों का फोकस प्रशासनिक कार्य पर ही है। 90 फीसदी अफसर वर्क फ्राम होम सिस्टम पर आ गए हैं। केवल मुख्य सचिव आरपी मंडल तथा कुछ अफसर री रोज पहुंच रहे हैं। फिलहाल मंत्रालय-सचिवालय समेत सभी विभागों ने विधानसभा के सवालों के जवाब देने पर फोकस रखा है। इसके अलावा डीपीसी और ट्रांसफर समेत प्रशासनिक कामकाज ही चालू हैं। शासन का फोकस रोजगार से जुड़ी उन्हीं योजनाओं पर है, जिनसे लोगों को रोजगार तथा सीधा लाभ मिल रहा है।

16 पाजिटिव, सैकड़ों क्वारेंटाइन
अब तक मंत्रालय में 16 अफसर-कर्मचारी पॉजिटिव निकल चुके हैं। इस वजह से सैकड़ों अफसर-कर्मचारियों को क्वारेंटाइन होना पड़ा है। जिन विभागों में कोरोना पाजिटिव निकल रहे हैं, अब उन दफ्तरों को सील नहीं किया जा रहा है। शासन के सभी विभागों में अफसर-कर्मचारियों की ड्यूटी अब पूरी तरह रोटेशन पर आधारित हो गई है।रोटेशन के अलावा जिन कर्मचारियों की जरूरत होती है, सिर्फ उन्हें बुलाया जा रहा है।हालांकि शासन ने इस पर भी रोक लगाई हुई है। विधानसभा के जवाबों को ध्यान में रखकर कुछ विभागों ने रोटेशन से बाहर कर्मचारी बुलाए हैं।

पुलिस मुख्यालय भी 33 फीसदी क्षमता से, 300 करोड़ के काम रुके
नए और पुराने पुलिस मुख्यालय में भी 33 फीसदी कर्मचारियों के साथ ही काम चल रहा है। अधिकारियों का आना जरूरी है, लेकिन कर्मचारियों की रोटेशन पर ड्यूटी लग गई है। भास्कर की पड़ताल में पता चला कि वहां भी प्रमोशन, अदालती मामले और स्टाफ वेलफेयर पर ज्यादा फोकस है। अफसरों ने बताया कि बेहद जरूरी 300 करोड़ रुपए के काम रुक गए हैं। बाहरी लोगों का आना-जाना भी मुश्किल है।
अगर अफसरों ने किसी को आने की अनुमति दी तो प्रवेश के नियम सख्त हैं। पहले हर व्यक्ति को सेनिटाइज किया जा रहा है। इसके बाद मास्क लगाकर प्रवेश दिया जा रहा है।

अस्पतालों की क्षमता आधी
राजधानी के सरकारी और निजी अस्पतालों में लगातार कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है। नर्सिंग होम एसोसिएशन के आला पदाधिकारियों के मुताबिक जिन अस्पतालों में कोरोना मरीज का इलाज चल रहा है, वहां 60 फीसदी स्टाफ संक्रमित हो चुके हैं। इनसे संपर्क में आए स्टाफ को भी तीन से चार दिन क्वारेंटाइन किया जा रहा है।

दुकानों में आधा स्टाफ ही
राजधानी की लगभग सभी दुकानें और बाजार शाम 7 बजे बंद हो जाते हैं। इस वजह से व्यापारियों ने भी अपनी दुकानों में स्टाफ कम कर दिया है। व्यापार आधा होने से दुकान के खर्चों को कम करने के लिए स्टाफ की कटौती की गई है। होटल-रेस्टोरेंट में लोगों की भीड़ नहीं होने की वजह से इन जगहों में भी कर्मचारियों की संख्या भी आधी कर दी गई है।

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