लॉकडाउन का पॉजिटिव इफैक्ट:रायपुर में 4 महीने में गांव के अस्पतालों में हुई 4 हजार डिलीवरी, 95 फीसदी नॉर्मल

राजधानी समेत जिलेभर कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन के चार महीने के दौरान गांव के छोटे से छोटे सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में बिना किसी बड़े व निजी अस्पताल आए 4104 डिलीवरी कराई गईं। इनमें से 95 फीसदी से ज्यादा डिलीवरी इन केंद्रों में नॉर्मल हुई। 01 अप्रैल से 31 जुलाई 2020 के बीच रायपुर स्थित डीकेएस व मेडिकल कॉलेज अंबेडकर अस्पताल के कुल केस को मिलाकर 8024 डिलीवरी हुई। गांव के उप स्वास्थ्य केंद्र में सीमित संसाधन के बीच वहां मौजूद नर्स व हेल्थ कर्मचारियों ने बड़े से बड़े रिस्की व गंभीर केस को सामान्य रूप से सफल डिलीवरी कराई।
लॉकडाउन के दौरान मिले इस पॉजिटिव हेल्थ इफैक्ट से यह हुआ कि 40-50 हजार रुपए खर्च पर निजी अस्पताल में डिलीवरी कराने वाले लोग भी अपने गांव की नर्स व हेल्थकर्मियों पर भरोसा जताया और बिना किसी खर्च के बच्चे का जन्म वहां कराकर दोनों स्वस्थ रहे। इस दौरान ऐसे स्वास्थ्य केंद्र में भी सफल डिलीवरी की गई, जहां कभी भी एक बच्चे की भी डिलीवरी नहीं कराई गई थी। रायपुर समेत जिले में कुल 157 स्वास्थ्य केंद्रों में चार महीने के दौरान 8024 डिलीवरी हुई।

इनमें से डीकेएस अस्पताल में 1490 व अंबेडकर अस्पताल में 2430 डिलीवरी की गई। इसके अलावा 4104 डिलीवरी जिले के 9 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 34 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 113 उप स्वास्थ्य केंद्र में की गई। अधिकतर नॉर्मल डिलीवरी उप स्वास्थ्य केंद्रों में कराई गई। यहां ऐसे भी मामले आए जहां एक या दो नर्स मिलकर रिस्की व गंभीर केस का भी सफल तौर पर हैंडल किया और बिना किसी ऑपरेशन व सीजेरियन के बच्चा का जन्म कराया। कुछ मामले में तो लोगों ने रात 2 या 3 बजे आकर यहां सामान्य डिलीवरी कराई। जच्चा व बच्चा दोनों स्वस्थ होकर गए। जबकि पिछले साल अप्रैल से जुलाई के बीच जिले में कुल 7414 डिलीवरी हुई थी, जो लॉकडाउन के चार महीने की तुलना में 610 कम है। इसके अलावा गांव के उप स्वास्थ्य केंद्र समेत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पिछले साल के इस चार महीने में 4021 बच्चों डिलीवरी कराई गई थी।

केस-1
पहला बच्चा सीजेरियन तो भी नॉर्मल कराया

कठिया उप स्वास्थ्य केंद्र की वीणा कुम्भाकर ने बताया कि लॉकडाउन में यहां 24 डिलीवरी कराई गई है। पिछले साल अप्रैल से जुलाई 2019 के बीच यहां एक भी डिलीवरी नहीं हुई थी। एक केस तो ऐसा था कि जिसमें महिला का पहला बच्चा सीजेरियन से हुआ था, उसकी डिलीवरी भी यहां नॉर्मल कराई गई। अभी जच्चा व बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।
केस-2
नवजात शिशु को लंग्स में था इंफेक्शन का सफल डिलीवरी कराई

कोलर उप स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ सीनियर नर्स अलोका चक्रवर्ती ने बताया कि चार महीनों के दौरान यहां 20 नॉर्मल डिलीवरी कराई गई। इस दौरान एक केस ऐसा आया जिसमें पेट में नवजात को लंग्स में इंफेक्शन दिखाई दिया था, उसके परिजन यहां डिलीवरी करा नॉर्मल तरीके से जन्म के बाद बच्चे को रायपुर भेजा गया। दोनों स्वस्थ हैं।

लोगों की जागरूकता व विश्वास बढ़ा
"राजधानी में अप्रैल व जुलाई लॉकडाउन के दौरान गांव में अधिकतर डिलीवरी उप स्वास्थ्य केंद्रों में ही हुई। यहां 95 फीसदी बच्चे बिना किसी सिजेरियन के जन्में। हेल्थकर्मियों के गांव-गांव जाकर लोगों को जागरुक किया और उनमें भी विश्वास बढ़ा है। सीमित संसाधन व सीमित मैन पावर में इतने डिलीवरी अपने आप में रिकॉर्ड हैं।"
-डॉ. मीरा बघेल, सीएमएचओ रायपुर

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