कोडाकू पारा बना टापू:3 उफनती नदियाें को पार कर 300 परिवार के लोग राशन ला रहे, नाले का पानी पीने को भी मजबूर

बलरामपुर जिले में आजादी के 70 साल बीत जाने के बाद भी अफसरों की लापरवाही के कारण कोडाकू जनजाति के लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। यहां के ग्रामीणों को रोज तीन नदियों को पार करना पड़ता है, तब घर पहुंच पाते हैं। उन्हें बरसात में नदी पार करते समय इस बात की चिंता रहती है कि वे किसी तरह शाम होने से पहले घर पहुंच जाएं। इसके बाद भी पुल पुलियों का निर्माण नहीं किया जा रहा है। वाड्रफनगर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत सुरसा के कोडाकू पारा में 300 कोडाकू जनजाति परिवार रहते हैं। यहां इनके लिए बिजली सड़क, पेयजल, पुलिया जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। यही कारण है कि उन्हें नदी-नालों का पानी पीना पड़ रहा है। गर्भवती को अगर हॉस्पिटल ले जाना हो तो गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंचती है।

बच्चे को गोद में लेकर नाला पार कर रही महिला
बच्चे को गोद में लेकर नाला पार कर रही महिला

पानी के लिए सिर्फ बरसाती नाला सहारा
गांव निवासी पूजा ने बताया कि यहां निस्तार के लिए पानी जुटाने का एकमात्र साधन बरसाती नाला है। जहां पर नाले के पानी से नहाने, बर्तन मांजने, बच्चों को नहलाने सहित सभी कामों में उपयोग में लाया जाता है। गर्मी के दिनों में पीने के पानी की काफी दिक्कत होती है। अभी बरसात है तो नाले के पानी से काम चल जाता है।

जल्द कराएंगे पेयजल की व्यवस्था: एसडीएम
एसडीएम विशाल महाराणा ने बताया कि अब तक ग्राम पंचायत सुरसा से ऐसी समस्या नहीं मिली है। अगर ऐसी समस्या है तो तत्काल संबंधित विभाग से बात कर पेयजल की व्यवस्था कराऊंगा। अभी बारिश का मौसम है, सड़क भी नहीं है और नल खनन के लिए वाहन जाने में दिक्कत होगी। बारिश कम होने पर तत्काल पेयजल की व्यवस्था कराई जाएगी।

नदी-नालों के कारण स्कूल नहीं जा पाते हैं बच्चे: यहां के बच्चे हर साल बरसात के दिनों में स्कूल नहीं जा पाते हैं। इन दिनों यहां ऑनलाइन पढ़ाई भी नहीं हो पा रही है। इतना ही नहीं राशन लेने के लिए लोग तीन नदी और नालों को पार कर दुकान तक जाते हैं। इसके बाद किसी तरह उसे घर लेकर आते हैं।

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