कोरोना से जंग:राजधानी के सभी वार्डों में कैंप लगाकर 16 लाख से ज्यादा लोगों का नापा जाएगा ऑक्सीजन लेवल

रायपुर देश का पहला ऐसा शहर होगा जहां सभी लोगों की यानी पूरी आबादी के ऑक्सीजन लेवल की जांच की जाएगी। अभी तक केवल कोरोना संक्रमितों या उनके संपर्क में रहने वाले लोगों के ही ऑक्सीजन लेवल की जांच होती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। शहरी आबादी यानी 70 वार्डों में रहने वाले 16 लाख से ज्यादा लोगों के ऑक्सीजन लेवल की जांच की जाएगी। इस पायलट प्रोजेक्ट को अभी रायपुर में लागू किया जा रहा है। राजधानी में यह सक्सेसफुल होता है तो इसे बाद में राज्य के सभी बड़े जिलों में लागू किया जाएगा।
राजधानी में लोगों के ऑक्सीजन लेवल की जांच करने के लिए अभी 50 पल्स ऑक्सीमीटर खरीदे गए हैं। इनकी टेस्टिंग की जा रही है। अभी इन मशीनों का उपयोग शहर के हॉट स्पॉट वाली जगहों बैरनबाजार, कटोरा तालाब, बैजनाथपारा, धोबीघाट, वीरभद्र नगर, ब्राह्मणपारा और सिविल लाइन में किया जा रहा है। सर्विलांस दल के सदस्य इन जगहों पर लोगों के घरों में जाकर उनके ऑक्सीजन लेवल की जांच कर रहे हैं। जिन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही है या मीटर में जिनका लेवल कम आ रहा है उन्हें कोविड-19 की जांच कराने की सलाह दी जा रही है। ऐसे लोगों के नाम और नंबर भी नोट किए जा रहे हैं ताकि बाद में यह पता किया जा सके कि ऐसे लोगों ने अपनी कोरोना जांच कराई है या नहीं। प्रशासन का दावा है कि जल्द ही सभी सर्विलांस दल को ऑक्सीमीटर उपलब्ध करवा दिया जाएगा।

 ऑक्सीजन लेवल से पता चलता है फेफड़ों में इंफेक्शन का
सामान्य तौर पर एक व्यक्ति का ऑक्सीजन लेवल 90 से कम नहीं होना चाहिए। इस तरह पल्स रेट 72 से 90 की रेंज में होना चाहिए। आक्सीजन और पल्स लेवल 90 से कम होता है, तो माना जाता है कि ऐसे लोगों को तत्काल अपनी जांच करानी चाहिए या फिर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। बुजुर्ग, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को इस तरह की शिकायतें ज्यादा हो रही हैं। इसलिए सर्विलांस दल से कहा गया है कि वे ऐसे लोगों की पहचान कर उनकी जांच करें। यह एक छोटी सी इलेक्ट्रानिक डिवाइस है, जिसे उंगली में फंसाकर पल्स रेट और ऑक्सीजन लेवल की जांच की जा सकती है। अस्पतालों में डॉक्टर भी इसी से पल्स रेट की जांच करते हैं। दरअसल कोरोना में जितनी मौतें हुई हैं, ज्यादातर में फेफड़े निमोनिया इंफेक्शन की वजह से क्षतिग्रस्त हुए थे। हाल में कोरोना कोर कमेटी ने गाइडलाइन दी है कि कोरोना पाजिटिव मरीजों के फेफड़ों का यथासंभव तुरंत सीटी स्कैन कर लिया जाना चाहिए। यह गाइडलाइन भी इसीलिए आई है ताकि समय रहते फेफड़ों को क्षतिग्रस्त होने से रोका जा सके। ऑक्सीमीटर भी इशारा करता है कि शरीर में फेफड़ों से जरूरी मात्रा में ऑक्सीजन पहुंच रही है या नहीं।

ऑक्सीजन की कमी से क्या
सीनियर फिजीशियन डा. अब्बास नकवी और निजी अस्पताल में आईसीयू इंचार्ज डॉ. इमरान गफूर के अनुसार शरीर में ऑक्सीजन लेवल कम होने से व्यक्ति बेहोश होने लगता है। कोरोना की स्थिति में यह लेवल एक सीमा के नीचे जाता है। इससे डाक्टरों को कोरोना संक्रमण की आशंका हो जाती है। ऐसी परिस्थिति में देरी होने पर मरीज गंभीर स्थिति में पहुंच सकता है, उसे तुरंत वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए ऑक्सीजन जांच कोरोना काल में महत्वपूर्ण है।

"अभी हॉट स्पॉट जगहों पर लोगों के आक्सीजन लेवल और पल्स रेट की जांच की जा रही है। जांच का दायरा बढ़ाया जाएगा और 70 वार्डों में किया जाएगा। इसके लिए मशीनों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है। राज्य का यह पहला पायलट प्रोजेक्ट है।"
-डॉ. एस भारतीदासन, कलेक्टर

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