सतर्कता जरूरी:राजधानी में कोरोना जांच से पीछे हटे लोग, रोज 1500 टेस्ट होने थे पर 10 दिन से सैंपल इसके आधे भी नहीं

राजधानी में कोरोना पर काबू पाने के लिए हेल्थ विभाग समेत सरकारी एजेंसियों ने ज्यादा से ज्यादा टेस्ट पर फोकस किया और 15 दिन पहले तय किया गया कि अब रोजाना औसतन 1500 टेस्ट किए जाएंगे। सभी सैंपल की जांच हो जाए, इसके लिए टेस्टिंग सेंटर भी बढ़ाए गए, लेकिन शहर में तब से ही अजीब ट्रेंड चल पड़ा है। कोरोना पाजिटिव के संपर्क में आए लोग ही टेस्ट से बच रहे हैं और पीछे हटने लगे हैं। हालात ऐसे हैं कि घर जा-जाकर आग्रह करने के बावजूद लोग मोबाइल वैन में एंटीजन टेस्ट भी नहीं करवा रहे हैं। कई लोग तो एंटीजन में पाजिटिव की आशंका पाए जाने के बाद अपना घर ही छोड़ने लगे हैं। भास्कर ने 1 से 10 अगस्त तक हुए टेस्ट की सूची हासिल की तो खुलासा हुआ कि केवल 6139 टेस्ट ही हो पाए हैं, जबकि औसतन 15 हजार हो जाने चाहिए थे। इसी का नतीजा है कि संक्रमण और तेजी से फैलने लगा है।
भास्कर की पड़ताल के मुताबिक रायपुर में जुलाई के अंतिम 8 दिन यानी 24 से 31 तारीख के बीच 9014 लोगों ने कोरोना जांच के लिए सैंपल दिया था। लेकिन अगस्त आते-आते यह संख्या तेजी से घटी है और 1 से 10 अगस्त के बीच केवल 6139 लोगों ने ही सैंपल दिए हैं। जबकि जुलाई अंत में सरकारी एजेंसियों ने तय किया था कि पाॅजिटिव मरीज से सीधा संपर्क, उससे हफ्तेभर में मिले लोग, ऐसे लोग जिन्हें सर्दी-बुखार हो और सांस लेने में दिक्कत आ रही हो, उन सबको मिलाकर रोज 1500 लोगों के सैंपल लेने ही हैं। तब यानी जुलाई अंत में रोजाना औसतन 1200 तक टेस्ट हो रहे थे, इसलिए यह टारगेट कठिन नहीं था। लेकिन इसका उल्टा हो रहा है। मरीजों के प्राइमरी कांटेक्ट व संपर्क में आने वाले लोग ही टेस्ट से बच रहे हैं। अगस्त में एक दिन में सबसे ज्यादा टेस्ट 900 ही हैं, जबकि 3 अगस्त को केवल 4 सैंपल ही लिए गए थे।
राजधानी में 11 अगस्त तक कोरोना से 47 लोगों की जान गई है। पाजिटिव केस भी साढ़े 4 हजार से अधिक हो गए हैं। रोजाना औसतन 150-200 पॉजीटिव मरीज मिल रहे हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति पाजिटिव मिलता है, सरकारी अमला उसके प्राइमरी कांटेक्ट की तलाश शुरू करता है। हालात ये हैं कि उसके घर में रहनेवाले से ही सैंपल मिल रहे हैं। यहां तक कि बिलकुल करीबी लोग भी सैंपल देने से पहले ही गायब हो रहे हैं। राजधानी के हाॅटस्पाॅट बने मंगलबाजार, ईदगाहभाठा, बोरियाकला, बिरगांव, माना, कबीर नगर, अर्जुन नगर समेत कुछ और इलाकों में यह बातें खुलीं कि कुछ लोगों ने काफी टालने के बाद सैंपल दिए, जबकि कुछ का तो अब तक अता-पता नहीं है। हेल्थ अफसरों का कहना है कि अगर इनमें से कुछ पाजिटिव होंगे तो वे जहां छिप रहे हैं, वहीं के लोगों को संक्रमित कर रहे हैं।

जांच से रुकेगा संक्रमण, मौतें
रायपुर सीएमएचओ डॉ. मीरा बघेल समेत हेल्थ अफसरों का कहना है कि उदाहरण के तौर पर अगर रोजाना 1000 लोगों का टेस्ट किया जा रहा है, तो इसका आशय ये है कि वे सभी मिलना-जुलना सीमित कर देते हैं। इनमें से अगर 500 लोगों का टेस्ट भी पॉजीटिव आया तो यह तो स्पष्ट रहता है कि उन लोगों ने संक्रमण नहीं फैलाया होगा। ऐसा न हो तो कोई भी पाजिटिव व्यक्ति दो-तीन दिन में 10 से ज्यादा लोगों को संक्रमित कर सकता है। हेल्थ अफसरों का यह भी कहना है कि जिन्हें कोई भी गंभीर बीमारी जैसे अस्थमा, शुगर, बीपी और किडनी इंफेक्शन वगैरह हो, तो उन्हें जांच करवा ही लेना चाहिए, ताकि गंभीर स्थिति में पहुंचने से बचाया जा सके।

तारीख और टेस्ट
01 अगस्त - 661
02 अगस्त - 350
03 अगस्त - 4
04 अगस्त - 609
05-अगस्त - 740
06 अगस्त - 930
07 अगस्त - 624
08 अगस्त - 712
09 अगस्त - 714
10 अगस्त - 855

10 दिन - 6139 टेस्ट

"यह सही है कि अगस्त में लोग टेस्ट के लिए कम आ रहे हैं। कालीबाड़ी में ही जुलाई अंत तक 300-350 लोग रोज सैंपल देकर जा रहे थे, अब सौ के आसपास ही हैं। टेस्ट का महत्व लोगों को समझना होगा।" डॉ. मीरा बघेल, सीएमएचओ रायपुर

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