जिले में 14वीं मौत:सुबह रैपिड किट से जिस मरीज की रिपोर्ट निगेटिव रात में मौत के बाद ट्रू-नॉट टेस्ट में आ गई पॉजिटिव

कोरोना मरीजों का सैंपल पूरी सुरक्षा के साथ लिया जा रहा है। स्वास्थ्य कर्मी घंटों तक पीपीई किट पहने रहते हैं।
  • कैंप-2 के युवक और सेक्टर-4 के शिक्षक की कोरोना से मौत

कोरोना का कहर जिले में बढ़ते ही जा रहा है। जिले में कोरोना से 17वीं मौत हो गई। 5 अगस्त की सुबह लाल बहादुर शास्त्री अस्‍पताल, सुपेला में रैपिड एंटीजेन किट से हुई जांच में जिस पेशेंट की रिपोर्ट निगेटिव आई थी, रात में मौत हो जाने के बाद उसी पेशेंट की ट्रू-नॉट से जांच करने पर 7 अगस्त को रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। खास बात यह कि दोनों विधि से हुई जांच के सैंपलों में 24 घंटे से ज्यादा का अंतर नहीं रहा।

कैंप-2 के वार्ड-24 स्थित संतोषी पारा निवासी डोमेन साहू (28) नाम का यह पेशेंट सर्दी, खांसी और बुखार के कारण बुधवार को शास्त्री अस्पताल, सुपेला की फीवर क्लीनिक पहुंचा था। डॉ. अविनाश नागदवे ने बॉडी टेंपरेचर और बीपी लेने के बाद उसकी रैपिड एंटीजेन किट से कोरोना जांच कराई। थोड़ी देर बाद रिपोर्ट निगेटिव आई तो सीजनल फ्लू की दवाएं देकर घर भेज दिया। परिजनों के मुताबिक रात करीब 11 बजे उसे सांस लेने में तकलीफ होने लगी। स्थिति बिगड़ती देख सभी उसे लेकर से-9 अस्पताल के लिए निकले लेकिन रास्ते में मौत हो गई।

दुखद: 8 दिनों की बेटी, उसकी पैदाइश में सेक्टर-9 जाता रहा: मौत से मात्र 8 रोज पहले ही से-9 अस्पताल में डोमन की पत्नी ने बच्ची को जन्म दिया था। इस पैदाइश में करीब 7 दिन पत्नी वहीं भर्ती रही। डोमन का आना-जाना जारी रहा। 28 जुलाई को छुट्टी के बाद मय जच्चा-बच्चा घर पहुंचा। 5 अगस्त की सुबह जांच कराने के बाद दवा ली और रात में मौत हुई।

चिंताजनक: न तेज बुखार, न सांस लेने में तकलीफ, पर मौत: सुपेला की फीवर क्लीनिक में डोमन को देखने वाले डॉक्टर ने बताया कि जब उन्होंने देखा उस वक्त उसको न तो तेज बुखार था, न ही उसने सांस लेने में किसी भी प्रकार की तकलीफ होना बताया। एहतियातन उन्होंने कोरोना की जांच कराई, रिपोर्ट निगेटिव आई तो दवा देकर घर भेज दिया।

चुनौतीपूर्ण: क्योंकि डॉक्टरों को अब विशेष ध्यान देना होगा: कैंप-2 में हुई इस मौत ने यह बता दिया कि फीवर क्लीनिक में बैठने वाले डॉक्टरों को अब संबंधी मरीज की जांच कराने के साथ ही उसे क्लीनिकली भी देखना होगा। ताकि किसी भी दशा में गंभीर हो सकने वाले मरीजों को समय रहते हायर सेंटर भेजा जा सके। इस मौत से सब हैरान है।

इसलिए पहले निगेटिव के बाद रिपोर्ट आई पॉजिटिव
जिला अस्पताल के पैथोलॉजिस्ट व कोविड लैब के इंचार्ज डॉ. पीके चंद्राकर बताते हैं कि मरीज में कम वायरल लोड होने पर रैपिड एंटीजेन किट ट्रेस नहीं कर पाती है। उससे होने वाली कोरोना जांच में निगेटिव आने वाले आगे वायरल लोड बढ़ने पर पॉजिटिव आ सकते हैं। सिमटोमेटिक की ही इससे जांच की जाती है। नान सिमटोमेटिक की ट्रू-नॉट या आरटीपीसीआर विधि से जांच होती है।

बेमेतरा में तैनात शिक्षक की एम्स रायपुर में मौत
बेमेतरा में बतौर शिक्षक तैनात रहते हुए सेक्टर-4 निवासी व्यक्ति ने कोरोना की चपेट में आने से एम्स, रायपुर में दौरान इलाज दम तोड़ दिया। वहां के प्रशासन ने इनकी कंटेनमेंट जोन में अन्य के साथ डोर-टू-डोर सर्वे करने की जिम्मेदारी दी थी। उसी के निर्वहन में यह खुद संक्रमित हो गए। इलाज के लिए उन्हें एम्स भेजा गया, जहां शुक्रवार को दौरान इलाज मौत हो गई।

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