प्रदेश के हर गांव में होगा एक इंडस्ट्रियल पार्क, गांव के गौठान की एक एकड़ भूमि ग्रामोद्योग गतिविधियों के लिए रहेगी आरक्षित

रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के हर गांव में एक इंडस्ट्रियल पार्क होगा। उन्होंने कहा कि गांव में गौठान के लिए आरक्षित की गयी जमीन में से एक एकड़ जमीन कुटीर और छोटे उद्योगों के लिए आरक्षित रहेगी, जहां स्व-सहायता महिला समूह लघु वनोपजों में वेल्यू एडीशन का काम करेंगे।
मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को एक ई-कॉन्क्लेव के समापन अवसर पर कहा कि गोधन न्याय योजना प्रदेश में 20 जुलाई को हरेली त्यौहार से शुरू की जा रही है। इस योजना में पशु-पालकों से गोबर खरीदकर गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट तैयार की जाएगी। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जहां गोबर की खरीदी की जाएगी। उन्होंने गांधी जी की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर शुरू की गई सुराजी गांव योजना की विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि यह योजना छत्तीसगढ़ में महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज की कल्पना साकार होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान भी छत्तीसगढ़ में जरूरी आर्थिक गतिविधियों को चालू रखा गया। प्रदेश के बड़े उद्योग कम क्षमता के साथ संचालित होते रहे। खदानें बंद नहीं हुई। मनरेगा के काम बड़े पैमाने पर प्रारंभ किए गए, जिनमें अधिकतम 26 लाख लोगों को काम मिला। न्याय योजना की प्रथम किश्त की राशि के रूप में पन्द्रह सौ करोड़ रुपए किसानों के खाते में डाले गए हैं। जिससे लॉकडाउन में भी उद्योग, व्यापार और व्यवसाय फले-फूले।
लॉकडाउन के दौरान प्रदेश में तीन हजार से अधिक ट्रेक्टरों की बिक्री हुई। पिछले वर्ष जून की तुलना में इस जून में जीएसटी कलेक्शन में 22 प्रतिशत की ग्रोथ हुई। रियल स्टेट सेक्टर को गति देने के लिए जमीनों की खरीदी-बिक्री की कलेक्टर गाइड लाइन दरों में 30 प्रतिशत छूट दी गयी है। पंजीयन शुल्क भी कम किया गया। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अधिक रजिस्ट्री हुई है।
बाेधघाट, कोल्ड स्टोरेज चैन तैयार करने नाबार्ड से मांगी मदद
छत्तीसगढ़ सरकार ने नाबार्ड से प्रदेश में बोधघाट सिंचाई परियोजना, सुराजी ग्राम योजना, गौठानों में छोटे प्रसंस्करणों की स्थापना तथा कोल्ड स्टोरेज चैन विकसित करने सहयोग मांगा है। शुक्रवार को नाबार्ड के स्थापना दिवस पर अध्यक्ष जीआर चिंताला के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई चर्चा में सीएम ने कहा कि नाबार्ड के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास के लिए बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर की जीवनदायिनी बोधघाट सिंचाई परियोजना लगभग 22 हजार करोड़ रूपए लागत आएगी जिससे पूरे अंचल में सिंचाई की सुविधा के साथ पेयजल और निस्तार के लिए पानी उपलब्ध होगा। साथ ही बस्तर के युवाओं को रोजगार देकर उन्हें मुख्य धारा में जोड़ने में सहायता मिलेगी। बघेल ने नरवा-गरूवा योजना के लिए नाबार्ड से सहयोग मांगा। सीएम ने प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में कृषि और उद्यानिकी फसलों को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज के निर्माण, फूड प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना के लिए भी सहयोग मांगा। इस अवसर पर कृषि एवं जल संसाधन मंत्री रविन्द्र चौबे उपस्थित थे।नाबार्ड के अध्यक्ष जीआर चिंताला ने कहा कि छत्तीसगढ़ सेे प्रस्ताव प्राप्त होने पर 20 से 25 हजार करोड़ रूपए की वित्तीय सहायता विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्याें के लिए उपलब्ध कराई जा सकती है। वहीं नाबार्ड छत्तीसगढ़ के सीजीएम एम सोरेन ने बताया कि 2020-21 में छत्तीसगढ़ में कृषि एवं ग्रामीण विकास के कार्याें के लिए 10 हजार करोड़ की वित्तीय सहायता और 20 करोड़ रूपए की अनुदान सहायता दिया जा सकता है।

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