कोरोना काल में ऑनलाइन लूडो और तीन पत्ती में बड़ा जुआ, साइबर पुलिस ने ट्रेस किए सैकड़ों आईडी

  • राजधानी में लाखों के दांव, पेमेंट ऑनलाइन इसलिए जुआ आया साइबर विशेषज्ञों की नजर में
  • पुलिस के पास ऐसे 2 हजार नंबर और बैंक खाता नंबर, जो 3 माह से खेल रहे हैं तगड़ा जुआ

रायपुर. प्रमोद साहू | कोरोना संकट और लाॅकडाउन के दौरान टाइम पास करने के झांसे से राजधानी के कई मोबाइल ग्रुप्स में शुरू हुए ऑनलाइन गेम जैसे लूडो किंग और तीन पत्ती अब जुए और सट्टे में तब्दील हो गए हैं। राजधानी में पुलिस के साइबर सेल के पास ऐसे तगड़े इनपुट, दर्जनों ग्रुप्स के सैकड़ों मोबाइल नंबर और बैंकों के खातों का ब्योरा है, जो इन गेम्स से जुए में भिड़े हुए हैं। इसी का फायदा उठाते हुए बड़े जुआरी और सटोरियों ने प्लेटफार्म बदलते हुए इन ऑनलाइन गेम्स से खुद को जोड़ लिया है। लोगों कोपता ही नहीं चल रहा है और जुआरी-सटोरिए ऐसे लोगों के नंबरों से अपना काम कर रहे हैं। राजधानी में शाम 7 बजे से रात 3 बजे तक इन ऑनलाइन गेम्स में रोजाना करोड़ों का वारा-न्यारा हो रहा है। जो नंबर और मेल आईडी इन ऑनलाइन गेम्स से लगातार घंटों कनेक्ट हैं, उनके ब्योरे से साइबर पुलिस ज्यादा दूर नहीं है।

पुलिस अधिकारी खुद मानते हैं कि ऑनलाइन गेम को भी लोगों ने जुआ-सट्‌टा से जोड़ दिया है। बच्चों का यह खेल अब लोगों के अवैध कारोबार का जरिया बन गए हैं। गेम में लोग जुआ-सट्‌टा खेल रहे हैं और बड़े बुकी ऑनलाइन टेबल तक चला रहे हैं। इनमें शहर के सैकड़ों लोगों को जोड़ लिया गया है, जिनमें ज्यादातर युवा हैं। उन्हें भनक भी नहीं लग रही है, फिर भी क्राइम में इनवाॅल्व होते जा रहे हैं। ऐसे ऑनलाइन टेबल में 1 लाख से 1 करोड़ रुपए तक के दांव की सूचना पुलिस को है। बड़े अफसरों ने कहा कि उनके पास ऐसे जुए और ग्रुप्स के पुख्ता इनपुट आ गए हैं।

ऐसे चल रहा ऑनलाइन गेम
राजधानी में लूडो किंग और तीन-पत्ती कुछ ग्रुप के लोगों ने तीन माह पहले डाउनलोड किया था। इसके बाद उन्हीं की तरफ से परिचितों को ऑनलाइन रिक्वेस्ट भेजी गई और लोग जुड़ते चले गए। शुरुआती कुछ दिन तक तो यह लाॅकडाउन के दौर में मनोरंजन की तरह चला लेकिन धीरे-धीरे अधिकांश ग्रुप ने खुद को लूडो किंग के जरिए जुए में ट्रांसफार्म कर लिया। सटोरियों ने तो अपने ग्रुप के नाम भी रख लिए हैं। यही नहीं, कुछ और गेम्स को भी सटोरियों ने अपनी जद में ले लिया है। इनमें रेसिंग वाले गेम्स, शूटिंग से लेकर निशानेबाजी और युद्ध वाले गेम्स के जरिए दांव लग रहे हैं। इस तरह, साइबर क्राइम का एक ऐसा जाल बुन लिया गया है, जिसमें नाबालिग भी फंसते जा रहे हैं।

नंबर और बैंक खाते की निगरानी
पुलिस गुंडे-बदमाशों तथा खुलेआम जुआ खेलनेवालों के बाद अब ऑनलाइन जुआरियों और सटोरियों पर फोकस कर रही है। क्योंकि गेम खेलने वाले कौन है, यह पता लगाना पुलिस के एथिकल हैकर्स के लिए बेहद आसान है। सूत्रों के अनुसार लूडो किंग और तीनपत्ती खेलने वाले सैकड़ों लोगों के नंबर पुलिस के पास हैं। अब इनके जरिए साइबर पुलिस इन ग्रुप्स से जुड़े लोगों के बैंक खाते, पैन नंबर, आधार कार्ड और मोबाइल नंबर की जानकारी लेने वाली है। इसके लिए नंबर और नाम के साथ संबंधित बैंकों को चिट्ठी लिखकर ट्रांजेक्शन के डीटेल मांगे जाएंगे। जरूरत पड़ी तो कुछ लोगों के मोबाइल नंबर और मेल आईडी निगरानी में भी रखे जा सकते हैं।

साइबर टीम की निगाह
"ऑनलाइन गेम को क्रैक करना कठिन था, इसलिए नया सिस्टम बना रहे हैं। साइबर क्राइम के एक्सपर्ट लोग तथा अफसर ऑनलाइन गेम्स में जुआ-सट्टा पकड़ने के लिए लगाए जा रहे हैं। इनकी टीम जल्दी कार्रवाई शुरू करेगी।"
-अजय यादव, एसएसपी रायपुर

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