बिलासपुर Chhattisgarh Sports । 54 खेल संघों की मान्यता खत्म होने से जहां खेल संघों में खलबली मची हुई है वहीं खिलाड़ियों का खेल भविष्य भी संकट में है। मान्यता खत्म होने से राष्ट्रीय स्तर पर उनका खेल पाना संभव नहीं है। जिले में इन संघों की जिला या राज्य इकाइयां संचालित हैं। अब इन इकाइयों व इससे जुड़े खिलाड़ियों को किसी प्रकार की मदद भी नहीं मिल पाएगी। खेल संघ से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि ऐसे में खिलाड़ियों को न तो खेल मंच मिलेगा और न ही राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा उभर के सामने आएगी।

इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत के प्रतिनिधित्व के लिए भी चयन करना चुनौती होगी। क्योंकि फेडरेशन के माध्यम से ही बड़ी संख्या में राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाएं सामने आती हैं और वे आगे कड़ी प्रक्रिया से गुजर कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर पाते हैं। ऐसे में संघ और खेल दोनों का भविष्य संकट में है।

यह है प्रक्रिया

किसी भी खेल संघ की मान्यता के लिए पहले राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता ली जाती है। इसमें कम से कम आठ प्रदेश इकाई की सहमति आवश्यक है। इसके बाद संघ उन प्रदेश इकाई को अपने स्तर पर संघ बनाने की मान्यता देता है। फिर प्रदेश के बाद जिला इकाई बनती है। इसमें भी कम से कम आठ जिला इकाई आवश्यक है।

 

इसके बाद ही केंद्र और राज्य सरकार से संघ को मदद मिलती है। खेल आयोजन व ट्रेनिंग प्रोग्राम समेत अन्य आयोजन हो पाते हैं। साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर ही संघ जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर के खेल आयोजन की रूपरेखा तैयार की जाती है।

इस खेलों की मान्यता खत्म

बेसबॉल, कबड्डी, शतरंज, टेनिस, कैरम, सॉफ्ट टेनिस, एथलेटिक्स, फुटबॉल, बॉल बैडमिंटन, बिलियर्ड, बॉक्सिंग, ब्रिज, साइकिल, साइकिल पोलो, घुड़सवारी, बास्केटबॉल, हॉकी, पोलो, जूडो, खो-खो, ट्रायथलान, हैंडबॉल, कराते, मलखंब, वेटलिफ्टिंग, शूटिंगबाल, टेबल-टेनिस, रोलर स्केटिंग, टेनिस बॉल क्रिकेट, कुश्ती, तलवारबाजी, राइफल, नेटबॉल, वुशू समेत 54 खेल संघों की मान्यता खत्म की गई है।

जल्द स्थिति सामान्य होने की उम्मीद

छत्तीसगढ़ हॉकी के महासचिव मनीष श्रीवास्तव का कहना है कि खेल संघों को जल्द ही मान्यता मिलने की उम्मीद है। अभी ओलिंपिक गेम भी होना है। ऐसे में खिलाड़ियों का चयन होना मुश्किल होगा। इससे लगता है कि मान्यता मिल जाएगी और स्थितियां भी सामान्य होंगी।

फिर से मान्यता की राह मुश्किल

एथलेटिक्स संघ सेक्रेटरी व खो-खो संघ के अध्यक्ष अमरनाथ सिंह का कहना है कि मान्यता जल्द ही मिलने की संभावना है। लेकिन, फिर से मान्यता की राह खेल संघों के लिए काफी मुश्किल भरी होगी। क्योंकि फिर से पेपर वर्क को पूर्ण करने में कई समस्याएं आएंगी। छोटे लेवल पर प्रशानिक काम कठिन होगा। इससे परेशानी भी लंबी हो जाएगी।

सरकार दें सुविधा और संसाधन

कबड्डी संघ के प्रदेश पदाधिकारी बसंत अंचल का कहना है कि सरकार यदि मान्यता नहीं देती है तो सभी प्रकार की सुविधा से संघ वंचित होगा। इसका नुकसान खिलाड़ियों को भी होगा। ऐसे में हम चाहते हैं कि सरकार ही संघ को अनुदान ही नहीं, मान्यता और स्वयं के खेल आयोजनों में सुविधा और संसाधन भी दे। एसोशिएशन के माध्यम से ही खिलाड़ियों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंच मिलता है।

खेल भविष्य खतरे में

तैराकी व ट्रायथलान के सचिव हेमंत परिहार का कहना है कि ऐसे में खिलाड़ियों का खेल भविष्य खतरे में है। यदि ऐसी ही स्थिति रहेगी तो कोई भी खेल को बेहतर स्वास्थ्य के लिए अपनाएंगे। अभिभावक भी अपने बच्चों को खेल को कॅरियर बनाने नहीं देंगे। वहीं राज्य व राष्ट्रीय प्रतियोगिता भी नहीं होगी। राष्ट्रीय प्रमाण-पत्र से खिलाड़ियों को अनेक विभागों में नौकरी का अवसर भी मिलना बंद होगा।

खिलाड़ियों का टूटेगा मनोबल

बेसबॉल संघ की महासचिव मिताली घोष का कहना है कि अकेले बिना किसी मदद के संघ चलाना संभव नहीं है। इसके लिए सरकार से मिलने वाली मदद आवश्यक है। साथ ही डाइट मनी, मेडल जीतने पर मिलने वाले अवार्ड और राज्य शासन से मिलने वाली पुरस्कार राशि खिलाड़ियों को आर्थिक मदद करती है साथ ही उनका मनोबल भी बढ़ाती है। मान्यता नहीं होने से उन्हें किसी भी प्रकार की मदद नहीं मिल सकेगी।