गांव सतर्क, राजधानी लापरवाह:ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसा लाॅकडाउन कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता, राजधानी में कंटेनमेंट जोन बेकाबू, मुहाने पर ही चाय-पान का दौर

राजधानी में कोरोना का संक्रमण खतरनाक स्थिति में पहुंच रहा है, लेकिन यहां से बमुश्किल 50 किमी दायरे के गांव फिलहाल सुरक्षित है। वजह ये है कि जागरुकता के बावजूद शहर में खासी लापरवाही हो रही है। इसके विपरीत, गांवों में वहीं के लोगों ने कोरोना के मामले में इतने सख्त कदम उठा रखे हैं कि अगर किसी के यहां एक केस निकला तो लगे हुए 50 घरों से कोई बाहर नहीं निकल सकता। गांववाले ही अपने स्तर पर बेरिकेडिंग कर रहे हैं। ज्यादातर गांवों ने चौपालें तक बंद कर दी हैं। 
भास्कर टीम शनिवार को राजधानी से 50 किमी दायरे के आधा दर्जन गांवों का जायजा लिया और पाया कि लोग खुद भी कोरोना से लड़ने केलिए तैयार हैं। सार्वजनिक चबूतरों और रंगमंचों को बांस-बल्ली से घेर दिया गया, ताकि कोई बैठक न सके। टीम दोपहर 2.30 बजे महासमुंद जिले के ग्राम पंचायत नांदगांव पहुंची। वहां एक दिन पहले ही प्रशासन ने कोरोना मरीज मिलने के बाद कंटेनमेंट जोन बना दिया है। उसमें करीब 50 घर हैं,। खेती-बाड़ी और चहल-पहल वाले इस सीजन में भी गांव में एक अजीब सन्नाटा पसरा है। लोग घरों के भीतर थे। भीतर से ही एक युवक ने बताया कि वहां से करीब 200 मीटर आगे का हिस्सा सील कर दिया गया है। गली को जहां पर सील किया गया वहां पहुंचते ही बांस-बल्ली की बेरिकेडिंग नजर आई और ठीक उसी समय एक पुलिसवाला सामने आ गया। कुछ देर में एसडीओपी और टीआई भी पहुंचे। उन्होंने बताया कि कंटेनमेंट जोन में 50 घर हैं। उन्हें किसी चीज की जरूरत होती है तो मंगवाकर वहीं रखे टेबल पर रख दिया जाता है। इसे लोग उठा ले जाते हैं। गांव के लोग खुद इतने जागरुक हैं कि कोई नियम नहीं तोड़ते। वहां किराना दुकान चला रहे मन्नू पटेल ने बताया कि वे खुद भी मरीज मिलने के बाद दुकान आने वाले हर किसी को वे मास्क के बगैर सामान नहीं देते।

घर ही बन गया कंटेनमेंट जोन
महासमुंद से करीब 35 किलोमीटर दूर बागबाहरा के पास सुनसुनिया गांव में एक परिवार करीब सप्ताहभर पहले आंध्रप्रदेश से लौटा था। कोरोना पाजीटिव मिलने के बाद उसके घर को चारों तरफ से बांस-बल्ली से घेर दिया गया। गांव वालों ने बताया कि मरीज का घर गांव के मुहाने पर ही है। आसपास ज्यादा घर नहीं होने की वजह से सिर्फ वही घर सील हुआ है। पंचायत पदाधिकारी नजर रख रहे हैं।

अमिताभ अरुण दुबे | राजधानी में कोरोना मरीजों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि की बड़ी वजह ये है कि प्रशासन ही नहीं, बड़ी आबादी भी कोरोना के मामले में बेफिक्री का बर्ताव करने लगी है। पहले सात-आठ कंटेनमेंट जोन ही सख्त रहे होंगे, अब तो मायने ही बदल गए हैं। प्रशासन भी मरीज वाले इलाके को 14 दिन तक कंटेन रखने में नाकाम होने लगा है। लोगों का तो ये हाल है कि बेरिकेडिंग के भीतर उनकी कोई गतिविधि बंद नहीं हुई है। यहां तक कि अधिकांश कंटेनमेंट जोन के सामने चाय-पान की दुकानें लग गई हैं, लोग मजे से आ-जा रहे हैं। प्रभावशाली इलाकों में तो पुलिस का घेरा भी दो-तीन दिन में हटने लगा है, जैसे राजधानी की पुलिस लाइन। 
भास्कर टीम ने शहर में कंटेनमेंट जोन क्षेत्रों का दौरा किया तो कई हैरान करने वाली बातें सामने आई। जैसे, गौरवपथ से सटे इलाके में कंटेनमेंट जोन का दायरा 50 मीटर कर दिया है। 14 दिन की मियाद पूरा करने में लोगों का सब्र जवाब देने लगा है। इसी कंटेन किए इलाके में बैरिकेड्स के सामने ही चायपान की दुकान चल रही है। घरेलू काम करने वाले भी आसानी से घूम फिर रहे हैं। इससे कुछ दूर, बैरनबाजार इलाके में एक कंटेनमेंट जोन 10 दिन में ही हटा लिया गया है। यहां पिछले डेढ़ हफ्ते में कुछ मरीज मिले थे। घेरा हटने के बाद शनिवार को यहां वैसी ही चहल-पहल नजर आई, जैसी आम दिनों में रहती है। यहां से करीब 500 मीटर दूर, पुलिस लाइन में फेरीवालों से लेकर आम लोग तक आराम से घूम-फिर रहे हैं। मुख्य मार्गों पर पहले ही तकनीकी तौर पर नाकाबंदी नहीं की जा सकती है, लेकिन यहां एप्रोच रोड पर भी अावाजाही नहीं रोकी गई है। ज्यादातर कंटेन किए क्षेत्र में जरूरी सुविधाओं के लिए लोग ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल ही नहीं कर रहे हैं। सब्जी-भाजी से लेकर दवाओं के लिए घेराबंदी तोड़कर बाहर जाने की जिद की जा रही है। कई बार पुलिस से बदसलूकी भी होने लगी है। राजधानी में केवल दो हफ्ते में ढ़ाई सौ लोगों के खिलाफ कंटेनमेंट जोन के नियम तोड़ने के लिए एफआईआर दर्ज की गई है।  
दायरा और घटाने की तैयारी
लगातार बिगड़ रहे हालात से प्रशासन कंटेनमेंट जोन को और सिकोड़ने की तैयारी में लग गया है। ऐसे जोन का दायरा घटाकर 50 से 25 मीटर करने पर विचार चल रहा है। इसमें 25 मीटर की घेराबंदी यानी जहां कोविड पीड़ित का घर है उस दायरे में सख्ती से 14 दिन के नियम का पालन किया जाए। हालांकि कुछ अफसर अड़े हैं कि दायरा 50 मीटर से बढ़ाकर 150 मीटर किया जाना चाहिए, ताकि बड़े इलाके को सील बंद कर सख्ती से सर्वे और जांच वगैरह हो सके।

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