कोरोना काल:पुस्तकें पहुंचीं पर बंटी नहीं, वर्चुअल क्लास में बिना किताब के ही पढ़ाई कर रहे बच्चे

जिले के 1400 से अधिक प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में वितरण नहीं, पुस्तकों की भी कमी

राज्य शिक्षा विभाग की ड्रीम प्रोजेक्ट पढ़ई तुंहर दुआर अंतर्गत वर्चुअल (ऑनलाइन) क्लास से पढ़ाई किया जाना है। इसके तहत शिक्षा विभाग ने जिले के सभी शिक्षकों को पोर्टल में पंजीयन कराने निर्देश दिया है। कई स्कूलों में वर्चुअल क्लास के माध्यम से पढ़ाई तो शुरू हो गई है, लेकिन बच्चे बिना पुस्तक के पढ़ाई कर रहें हैं, क्योंकि बच्चों के पास पुस्तक नहीं है। गौर करने की बात है कि शिक्षा विभाग द्वारा संकुलों में पुस्तक भेजी गई है। यह पुस्तक स्कूलों के माध्यम से बच्चों तक पहुंचना है। लेकिन बच्चों को वितरण नहीं किया है।

पाठ्य पुस्तक निगम के माध्यम से पंडरिया ब्लॉक के वनांचल ग्राम कुई, नेउर, बदना, पोलमी, भाकुर, सेंदूरखार आदि संकुल में पुस्तक पहुंचाया जा रहा है। संकुल प्रभारी कुई ने बताया कि संकुल को प्राप्त पुस्तकों को सभी प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं के प्रधान पाठकों को वितरण किया जाएगा। उन्हें निर्देश दिया जा रहा है कि इन पुस्तकों को किसी भी तरह बच्चों तक पहुंचाया जाए। पुस्तक कम संख्या में आई है। कई विषय की एक भी पुस्तकें नहीं है। कुई संकुल को छठवीं विज्ञान की एक भी पुस्तक नहीं मिली है।

बड़ा सवाल: स्कूली बच्चों तक किताबें कैसे पहुंचेगी
वर्तमान समय में बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए सभी स्कूल बंद है। यहां पढ़ाई के साथ-साथ दाखिले की भी प्रक्रिया बंद है। कई शिक्षक स्कूल तो आ रहे हैं‌, लेकिन वे स्कूल से संबंधित जैसे टीसी जारी करने, छात्रवृत्ति, जाति प्रमाण पत्र संबंधित दस्तावेज बच्चों को देने का काम कर रहे हैं। वहीं कुछ समय निकालकर वर्चुअल क्लास ले रहे हैं। अब समस्या यह है कि वर्चुअल क्लास के दौरान बच्चों के पास पुस्तक ही नहीं होगा तो पढ़ाई कैसे होगी।

आंकड़ें नहीं, बीते वर्ष के हिसाब से भेज रहे पुस्तक
पुस्तक वितरण को लेकर विभाग को बच्चों की सही जानकारी नहीं मिल पा रही है। इस कारण विभाग द्वारा रायपुर से पुस्तकों की डिमांड बीते वर्ष के आंकड़े के हिसाब से भेजी गई है। बीते वर्ष कक्षा एक से लेकर 8वीं तक पूरे जिले में करीब 1.20 लाख से अधिक बच्चे थे। इसे देखते हुए प्रति बच्चों के हिसाब से पुस्तक की डिमांड भेजी गई है। फिर भी कई कक्षाओं की पुस्तक नहीं मिल रही है। इस कारण आने वाले समय में बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

जो शिक्षक वर्चुअल कक्षा नहीं लेंगे उनका वेतन रोकेंगे

पुस्तक वितरण को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी केएल महिलांगे का कहना है कि वर्तमान में पुस्तकों को संकुल तक में भेजा जा रहा। इसके बाद संकुल से स्कूल के लिए जारी करेंगे। कुछ विषयों की पुस्तकें रायपुर से नहीं है। इसे लेकर डिमांड भेजा है। उन्होंने बताया कि पढ़ई तुंहर दुआर अंतर्गत सभी शिक्षकों को वर्चुअल क्लास लेना अनिवार्य है। इस संबंध में 100 प्रतिशत शिक्षकों को पंजीयन कराने के साथ ही कक्षा लेने के निर्देश दिए है। कोई भी शिक्षक पंजीयन के साथ वर्चुअल कक्षा नहीं लेता तो वेतन रोके जाने की कार्रवाई करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी शिक्षकों की होगी।

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