Ambikapur News: शैव कालीन पुरातत्व स्थल डीपाडीह में ऐतिहासिक धरोहरों की हो रही ऐसी दुर्दशा

Ambikapur News: अम्बिकापुर। उत्तरी छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में स्थित डीपाडीह में आठवीं व 14 वीं शताब्दी के पुरातत्व धरोहर बडी संख्या में मौजूद हैं। दूर-दूर से सैलानी यहां इन्हें देखने आते हैं, लेकिन इन दिनों यह दुर्दशा के दौर से गुजर रहे है। इस प्राचीनतम पुरातत्व स्थल में एक माह पूर्व विशाल वृक्ष धरासाई हो गया था। वृक्ष के धरासाई होने से कई मूर्तियां क्षतिग्रस्त हो गई।

कई अमूल्य मूर्तियों के साथ मुख्य द्वार पर रखी गई नंदी की प्रतिमा भी क्षतिग्रस्त हो गई है। कई जगहों से कुछ प्रतिमाओं के गायब होने की भी आशंकाएं हैं। इन सबके बावजूद जिला प्रशासन व पुरातत्व विभाग सुप्रसिद्ध डीपाडीह के पुरातात्विक धरोहरों की सुध नहीं ले रहे।

डीपाडीह पुरातत्व स्थल की सुरक्षा के लिए एकमात्र चौकीदार रखा गया है जिसने एक माह पूर्व विशाल पेड़ गिरने की जानकारी बिलासपुर स्थित पुरातत्व विभाग में दी थी, किंतु आज तक कोई यहां गिरे पेड़ को हटाने और क्षतिग्रस्त मूर्तियों को व्यवस्थित करने नहीं पहुंचा।

बलरामपुर जिला प्रशासन भी डीपाडीह को लेकर गंभीर नहीं है। धीरे-धीरे यहां की प्रतिमाएं भी गायब हो रही हैं। कभी यहां विभिन्न देवी-देवताओं के साथ कई ऐसी प्रतिमाएं थीं जिनमें भारत के इतिहास कि झलक नजर आती थीए लेकिन इस पुरातत्विक स्थल की अनदेखी से यहां का अस्तित्व भी मिटते नजर आ रहा है।

शैव व शाक्य कालीन हैं डीपाडीह की प्रतिमाएं

अंबिकापुर से कुसमी मार्ग पर 75 किलोमीटर दूर डीपाडीह नामक स्थान है। आठवीं से 14 वीं शताब्दी के शैव एवं शाक्य संप्रदाय के पुरातत्विक अवशेष माने जाते हैं।चारों ओर पुरातात्विक अवशेष बिखरे पड़े हैं। इसे सहेजने की कुछ वर्ष पूर्व कोशिश हुई थी किंतु प्रशासन की लापरवाही से व पुरातत्व विभाग की लापरवाही से अवशेषों को सहेजा नहीं जा सका। डीपाडीह के आसपास अनेक शिव मंदिर होने के प्रमाण हैं। यहां अनेक शिवलिंग, नदी, देवी दुर्गा की कलात्मक मूर्तियां स्थित हैं।

यहां के मंदिर के खंभों पर भगवान विष्णु, कुबेर, कार्तिकेय व अन्य देवी-देवताओं की कलात्मक मूर्तियां विद्यमान हैं। देवी देवताओं में एक विशिष्ट मूर्ति महिषासुर मर्दिनी की भी है।देवी चामुंडा की अनेक प्रतिमाएं भी यहां नजर आती हैं। यहां स्थित उरांव टोला शिव मंदिर भी अत्यंत कलात्मक है जो शैव व शाक्य परंपरा का प्रमाण है। इस मंदिर के भित्तियों पर आकर्षक ज्यामितिय अलंकरण है। मंदिर का प्रवेश द्वार लक्ष्मी की प्रतिमा से सुशोभित है। उमा, महेश्वर की प्रतिमा भी काफी दर्शनीय है। इस स्थान पर कलात्मक भग्नावशेष दर्शनीय हैं।

खजुराहो शैली की प्रतिमाएं भी है यहां

डीपाडीह की मैथुन मूर्तियां खजुराहो शैली की बनी हुई है।यहां स्थित उरांव टोला शिव मंदिर,सावंत सरना प्रवेश द्वार,महिषासुर मर्दिनी की विशिष्ट मूर्ति, पंचायतन शैली की शिव मंदिर, लक्ष्मी की मूर्ति,उमा महेश्वर की आलिंगनरत मूर्ति, भगवान विष्णु, कुबेर, कार्तिकेय की कलात्मक मूर्तियां देखने दूर-दूर से लोग यहां आते हैं। यहां विशाल सूर्य मंदिर के अवशेष भी मिले हैं। यहां सूर्य की प्रतिमा भी मिली थी जो खंडित है।

चोरी हुई प्रतिमाओं की आजतक नहीं हुई खोजबीन

डीपाडीह में चोरी हुई मूर्तियों की आज तक खोजबीन नहीं हुई। जिला प्रशासन व पुरातत्व विभाग ने कभी यहां की चोरी गई मूर्तियों को खोजने का प्रयास नहीं किया।यहां कितनी मूर्तियां हैं इसकी गणना तक नहीं हुई है। करीब 10 वर्ष पूर्व यहां की दुर्लभ प्रतिमाएं चोरी हुई थीं। तब सुरक्षाबक उपाय भी किये गए थे। अब तो सुरक्षा के नाम पर एक कर्मचारी है।

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