81 डॉक्टर समेत 221 मेडिकल स्टाफ संक्रमित, कोविड से ज्यादा नॉन कोविड हॉस्पिटल में कोरोना का खतरा

रायपुर . प्रदेश में कोरोना संक्रमण की रफ्तार से स्पष्ट है कि कोरोना के विरुद्ध लड़ाई दो-चार महीने तक नहीं, बल्कि लंबी चलनी है। ऐसे में सबसे ज्यादा जरूरी है कि हमारे अपने डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ सुरक्षित रहें। क्योंकि ये ही कोरोना से जंग जीता सकते हैं। मगर, मौजूदा स्थिति में इनके संक्रमित होने की दर भी काफी बढ़ी है। 20 जुलाई तक के आंकड़ों के मुताबिक 221 हेल्थ केयर वर्कर्स संक्रमित मिले हैं, जिनमें 81 डॉक्टर है। अब कोविड हॉस्पिटल से ज्यादा खतरा नॉन कोविड हॉस्पिटल में पैदा हो गया है।

'पत्रिका' पड़ताल में सामने आया कि ब्लॉक-2 में नॉन कोविड हॉस्पिटल में सबसे ज्यादा हेल्थ केयर वर्कर कोरोना संक्रमित हुए है। इसका सबसे ताजा उदाहरण है डीकेएस सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल। यहां के 4 डॉक्टरों समेत 20 स्टाफ संक्रमित है। प्लास्टिक सर्जरी, यूरोलॉजी के स्पेशलिस्ट तो संक्रमित हुए ही, खाना बांटने वाले भी संक्रमित पाए गए। अभी यहां कांटेक्ट ट्रेसिंग जारी है। एम्स में अब तक सबसे ज्यादा डॉक्टर, नर्स और अन्य स्टाफ कोरोना संक्रमित पाए गए हैं, उसके बाद डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल का स्टाफ। स्टेट कोरोना कंट्रोल एंड कमांड सेंटर की कांटेक्ट ट्रेसिंग टीम की मानें तो स्टाफ के स्तर पर लापरवाहियां हुई हैं।

अस्पतालों में कांटेक्ट ट्रेसिंग टीम बनाएं
स्वास्थ्य विभाग की तरफ से अब सभी सरकारी, निजी कौन कोविड और कोविड हॉस्पिटल के प्रमुखों को कहा गया है कि वे अस्पताल के स्तर पर एक कांटेक्ट ट्रेसिंग टीम बनाएं। स्टाफ या मरीज के संक्रमित पाए जाने पर जिला और राज्य की टीमें अपना काम करेंगी, अस्पताल भी ट्रेसिंग करें। इससे प्राइमरी कांटेक्ट तक पहुंचने में आसानी होगी।

कर चुके हैं क्लीनिक ऑडिट की मांग
मेडिकल स्टाफ के संक्रमित होने के कारणों की तह तक पहुंचने के लिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) छत्तीसगढ़ और हॉस्पिटल ने क्लीनिक डेट का मांग उठाई थी। हॉस्पिटल बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता का कहना है कि लड़ाई लंबी चलनी है. इसलिए हेल्थ केयर वर्कर्स के लिए बने सेफ्टी प्रोटोकॉल का पूरा पालन करवाया जाए।

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