24 मार्च को रायपुर में कोरोना का था एक मरीज, 80 दिन में 100 और पिछले 19 दिन में 300 पार

100 दिन: लॉकडाउन के 69 दिन और अनलॉक के 31 दिनों का पूरा 'कोरोना हिसाब'

तारीख- दर- तारीख :-
18 मार्च- रायपुर में प्रदेश का पहला कोरोना मरीज
24 मार्च- रात 8 बजे लागू हुआ था लॉकडाउन-1
01 जून- अनलॉक डाउन-1 की हुई थी शुरुआत
31 मई- रायपुर में सिर्फ 15 मरीज मिले थे
30 जून- रायपुर में मरीजों की संख्या 324 पहुंची

रायपुर. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर, जहां से प्रदेश स्तरीय सरकारी तंत्र पूरे प्रदेश में काम करता है। यहीं से सभी 28 जिलों में वैश्विक महामारी पर नियंत्रण पाने की कवायद की जा रही है। मगर, इन दिनों रायपुर प्रदेश के मुखिया से लेकर हर एक रायपुरवासी के चिंता का कारण बना हुआ है। 14 मई से रायपुर में कोरोना के मरीजों ने जो रफ्तार पकड़ी, वह जून में तो दोगुनी हो गई और नतीजा सबके सामने हैं। प्रदेश में 18 मार्च को पहला कोरोना मरीज रायपुर में ही मिला था। 24 मार्च को लॉकडाउन-1 के समय संक्रमित मरीजों की संख्या 1 ही थी। मगर, 80 दिनों में (11 जून) आंकड़ा 100, अगले 10 दिनों में (21 जून) को 200 और अगले 9 दिनों में (30 जून) 300 पार हो गया। अब तो स्थिति यह है कि रायपुर में सबसे ज्यादा 324 और सबसे ज्यादा 127 एक्टिव मरीज हैं। इसके बाद कोरबा, राजनांदगांव और बलौदाबाजार का नंबर आता है। हर दिन कोरोना मरीजों का आंकड़ा तेजी से ऊपर चढ़ रहा है।

रायपुर शहर में आज के दिन में ऐसा कोई हिस्सा नहीं शेष है जहां कोरोना की दस्तक नहीं हुई है। हर आयुवर्ग के लोग इस बीमारी के गिरफ्त में आ रहे हैं। बावजूद इसके नियमों को तोडऩे से कोई घबरा भी नहीं रहा है। लोगों में मॉस्क लगाकर घर से निकलने की आदत खत्म होती दिखाई दे रही है। बाजारों में सोशल डिस्टेंसिंग और फिजिकल डिस्टेंसिंग सिर्फ नाम के लिए रह गई हैं। इसका न दुकानदार पालन कर रहे हैं, न ग्राहक। अब तक मॉल, धार्मिक स्थल, उद्यान खुल चुके हैं। खुलने बाकी हैं तो सिनेमाघर और बार। अब कोरोना के नियंत्रण की दिशा में ठोस और कड़े फैसले लेने की जरुरत है। आम से लेकर खास लोगों के सुझाव- भले ही केंद्र सरकार निर्णय न ले, मगर छत्तीसगढ़ का शासन-प्रशासन कुछ दिन लॉकडाउन या फिर नियमों के सख्ती से पालन करवाने का निर्णय तो ले ही सकता है। क्योंकि बगैर कड़ाई के कोरोना के संक्रमण का फैलाव रुकने वाला नहीं है। 1 जून से लागू हुए अनलॉक में ढील देकर इसका अनुभव किया जा चुका है। कम से कम रायपुर समेत उन शहरों में जहां हालात नियंत्रण से बाहर होते दिख रहे हैं। बतौर उदाहरण- तेलगांना सरकार ने अपने कुछ जिलों में अनलॉक में भी लॉकडाउन लगाकर रखा था।

तारीख- पॉजिटिव- एक्टिव- मौत

24 मार्च- 01- 01- 01
11 जून- 104- 91- 01

21 जून- 213- 104- 01
30 जून- 324- 127- 01

(नोट- 11 जून को मिले थे 6 मरीज, 21 जून को 17 और 30 जून को 49 मरीज)

पहली मौत बिरगांव में
29 मई को रायपुर जिला अंतर्गत बिरगांव निवासी फैक्टरी मजदूर की मौत हुई थी। मृतक सांस संबंधी बीमारी से पीडि़त था, बाद में उसे निमोनिया हुआ। तब से लेकर अब तक कोरोना १३ लोगों की जान ले चुका है। इनमें से नौ मौतें एम्स रायपुर में इलाज के दौरान हुई हैं। क्योंकि गंभीर कोरोना मरीजों के लिए को रेफरल सेंटर बनाया गया है।

अब तक ऐसे पहुंचा रायपुर में कोरोना का खतरा


सबसे पहले विदेश से लौटने वालों से
प्रदेश में १८ मार्च को मिली रायपुर समता कॉलोनी निवासी पहली कोरोना मरीज लंदन से लौटी थी। शुरुआती महीने, डेढ़ महीने तक तो ऐसा माना गया कि २४ मार्च (लॉक-डाउन) के पहले तक विदेश से आने कोरोना लेकर आ रहे हैं, जो सच था। यही वजह थी कि विदेश से आने वालों के लिए सूचना जारी की गई कि वे सरकार को सूचित करें। जिन्होंने नहीं किया और जो संक्रमित मिले, उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई। एयरपोर्ट पर एक-एक व्यक्ति की स्क्रीनिंग की गई। क्योंकि विदेश से आने वाले प्लेन से ही आ रहे थे।


पैदल आ रहे मजदूरों से
ट्रेन, बस और अन्य सभी साधन बंद होने के चलते मजदूरों ने पैदल कूच करनी शुरू कर दी। प्रदेश की सीमा पार कर मजदूर रायपुर तक आ पहुंचे तो शासन-प्रशासन की नींद टूटी। यहां पर मजदूरों की उनके जिलों में पहुंचाना शुरू हुआ। इस दौरान शहर के फ्रंट लाइव वर्कर संक्रमित हुए।


सरकारी व्यवस्था के तहत हुए मजदूरों की वापसी से
१४ मई के बाद सरकार द्वारा मजदूरों की वापसी करवाई जाने लगी। इन्हें क्वारंटाइन सेंटर में रखा गया। रायपुर जिला अंतर्गत अभनपुर, तिल्दा, नया रायपुर, संकरी, माना स्थित जैनम समेत दर्जनों सेंटर में ठहराए गए मजदूर संक्रमित मिलना शुरू हुए।

अब रूस और किर्गिस्तानी से लौटने वालों छात्रों से
रायपुर में बीते हफ्तेभर में रूस और किर्गिस्तान से लौटने वाले ७८ छात्र कोरोना संक्रमित पाए चुके हैं। अभी भी १०० से अधिक छात्र शहर के पेड क्वारंटाइन सेंटर में हैं। इन दो देशों में ५०० से अधिक छात्र अभी भी फंसे हैं। ये या फिर जो भी व्यक्ति विदेश से लौटेंगे वे रायपुर माना स्थित स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर ही उतरेंगे। तब तक राजधानी में खतरा रहेगा। विदेश से लौटना वालों से कोरोना फैलना का यह दूसरा फेज है।

हर व्यक्ति को यह समझाना होगा कि कोरोना वायरस पर नियंत्रण तभी संभव है जब हम और आप नियमों का पालन करेंगे। नियम तोड़ेंगे तो यह वायरस को और फैलने में मदद करेगा। डॉक्टर इलाज कर सकता है, मगर कोरोना को समाज से खत्म करने का इलाज सिर्फ लोगों के पास ही है।
डॉ. आरके पंडा, विभागाध्यक्ष, टीबी एंड चेस्ट, डॉ. आंबेडकर अस्पताल एवं सदस्य कोरोना कोर कमेटी, छत्तीसगढ़

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