राजधानी में कोरोना:रायपुर में 179 लोग संक्रमित, कुकुरबेड़ा बना नया हाॅटस्पाॅट, 14 नए केस मिले

राजधानी के रायपुरा महादेव घाट के एक मोहल्ले में रहने वाली 3 महिलाएं पाॅजिटिव पाई गईं। उनके घर हेल्थ व नगर निगम जोन क्रमांक 5 की टीम पीपीई किट पहने हुए सोमवार दोपहर लेने पहुंची। एंबुलेंस की कमी के कारण निगम की टीम सिटी बस लेकर पहुंची थी। इस दौरान अमले को देख मोहल्ले के लोग सहम गए। कुछ देर बाद तीनों महिलाएं अपने जरूरत के सामान झोले में लेकर बाहर निकलीं कोविड सेंटर जाने के लिए सिटी बस में चढ़ीं। इस दौरान पूरी सड़क पर सन्नाटा छा गया और लोग अपने छतों व दरवाजों पर खड़े होकर उन्हें जाते हुए देखते रहे।-

राजधानी रायपुर में साेमवार को कोरोना के 179 केस मिले हैं। पिछले करीब आठ दिन से शहर में कोरोना के मरीज एक दिन में सौ से ज्यादा ही मिल रहे हैं। पिछले 24 घंटे में प्रदेश में कोरोना से 367 संक्रमित लोगों का पता चला है। इधर, राजधानी के हॉट स्पॉट शदाणी दरबार के 50 वर्षीय व्यक्ति की एम्स ले जाने के दौरान मौत हो गई। बिलासपुर में भी 35 वर्षीय महिला की मौत हो गई। प्रदेश में कोरोना से यह 46 वीं मौत है। नए केस के बाद प्रदेश में मरीजों की संख्या 7980 पहुंच गई है। एक्टिव केस 2763 है। विभिन्न अस्पतालों से 228 मरीजों को छुट्‌टी दी गई। अब तक 5172 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। अभी तक 2.92 लाख से ज्यादा सैंपलों की जांच हो गई है। एंबुलेंस की समस्या को देखते हुए शासन ने अस्पताल से डिस्चार्ज मरीजों को एंबुलेंस के बजाय अपनी गाड़ी से घर जाने की सुविधा दे दी है। रायपुर में कोरोना के थोक में केस आ रहे हैं। शदाणी दरबार, मंगलबाजार, आमापारा के बाद कुकुरबेड़ा नए हॉट स्पॉट के रूप में सामने आया है।

राजधानी में जो मरीज मिले हैं, उनमें कुकुरबेड़ा से 14, टिकरापारा से 8, आरंग थाने से 7, लाखेनगर से 6, बीएसएफ कैंप आरंग से 4, नवा रायपुर से तीन मरीज शामिल हैं। जिला अस्पताल के डॉक्टर भी संक्रमित हुआ है। वहां सिविल सर्जन व उनकी पत्नी पहले ही संक्रमित हो चुके हैं। लाखेनगर में नए संक्रमित एक ही परिवार के हैं। राहत की बात ये है कि शदाणी दरबार से केवल एक व मंगलबाजार से कोई नया मरीज नहीं मिला है। दोनों ही इलाकों में 200 से ज्यादा मरीज हो गए हैं। मंगलबाजार में अब तक एक मरीज की मौत भी हो चुकी है। संक्रमितों में एक साल से कम की एक नवजात भी है, जो धरसींवा क्वारेंटाइन सेंटर में था।

एंबुलेंस की समस्या को देखते हुए शासन ने अस्पताल से डिस्चार्ज मरीजों को एंबुलेंस के बजाय अपनी गाड़ी से घर जाने की सुविधा दे दी है। अगर अस्पताल प्रबंधन एंबुलेंस की जगह कोई दूसरा वाहन उपलब्ध कराए तो भी वे घर जा सकते हैं। इस संबंध में स्वास्थ्य सचिव निहारिका बारीक ने सोमवार को सभी कलेक्टरों को पत्र लिखकर जरूरी व्यवस्था करने को कहा है। एंबुलेंस की कमी के कारण कई मरीजों को डिस्चार्ज होने के बाद 5 से 7 घंटे इंतजार करना पड़ रहा है। कई जिलों में पर्याप्त एंबुलेंस भी नहीं है। आईसीएमआर की गाइडलाइन बदलने के बाद अब 5 से 10 दिनों में थोक में मरीज डिस्चार्ज हो रहे हैं। हालांकि इसकी तुलना में तीन से चार गुना नए मरीज भी आ रहे हैं। इस कारण भी जिन लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, ऐसे कई लोगों को अस्पताल पहुंचाने में 48 से 72 घंटे भी लग रहे हैं। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।
देरी से जांच, इलाज में देरी इसलिए बच नहीं रहे लोग
पिछले सप्ताहभर में कोरोना से मरने वालों की संख्या भी बढ़ी है। एक हफ्ते में 15 लोगों की मौत हो चुकी है, यानी रोज दो लोगों की जान कोरोना से जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि कई मरीज देरी से जांच करवा रहे हैं। इस कारण इलाज में भी देरी हो रही है। ऐसे मरीज गंभीर होते हैं और मौत हो जाती है। ऐसे में जरा भी लक्षण दिखने पर या किसी मरीज के संपर्क में आने पर स्वाब की जांच जरूर करवानी चाहिए।

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