16 हजार से ज्यादा शिक्षाकर्मियों का संविलियन, गोधन न्याय योजना के तहत अब डेढ़ की बजाए दो रुपए किलो में गोबर खरीदेगी सरकार

  • दो साल की सेवा पूरी कर चुके शिक्षाकर्मियों का होगा संविलियन
  • 1,10,000 शिक्षाकर्मियों का पहले ही हो चुका है
  • दो रुपए में गोबर खरीदेगी और आठ रुपए में खाद बेचेगी सरकार

रायपुर. सीएम भूपेश बघेल ने कैबिनेट की बैठक में मंगलवार को बड़ा फैसला लिया। इसमें पिछले डेढ़ साल से संघर्ष कर रहे शिक्षाकर्मियों के संविलियन पर मुहर लग गई है। छत्तीसगढ़ में दो साल की सेवा पूरी कर चुके 16 हजार से ज्यादा शिक्षाकर्मियों का एक नवंबर 2020 से संविलियन हो जाएगा। इससे पहले नई सरकार बनने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक लाख दस हजार शिक्षाकर्मियों का संविलियन किया था। इसके बाद बचे शिक्षकों के संविलियन की बात कही थी। अब दायरे में आने वाले सभी शिक्षाकर्मियों का संविलियन कर दिया गया है। इसके अलावा भूपेश मंत्रिमंडल ने कई और अहम फैसले किए। इनमें गोधन न्याय योजना के तहत सरकार अब डेढ़ रुपए नहीं, बल्कि दो रुपए किलो में गोबर खरीदेगी। सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि यह पूरी दुनिया की पहली योजना होगी जिसमें गोबर खरीदकर सरकार खाद बनाएगी।

हरेली के दिन 21 जुलाई से शुरू होगी योजना
गोधन न्याय योजना हरेली के दिन 21 जुलाई से शुरू होगी। इसके लिए गोबर खरीदी की दर निर्धारित करने वाली कैबिनेट उपसमिति ने पहले प्रति किलो डेढ़ रुपए की दर से गोबर खरीदने का प्रस्ताव दिया था लेकिन कैबिनेट ने परिवहन खर्च को ध्यान में रखते हुए इसे दो रुपए करने पर सहमति दी। वहीं इस योजना से बनने वाली वर्मी कम्पोस्ट (खाद) को 8 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जाएगा। प्रदेश में अब तक 53 सौ गौठान स्वीकृत किए जा चुके हैं। इसमें से ग्रामीण क्षेत्रों में 2408 और शहरी क्षेत्रों में 377 गौठान बन चुके हैं, जहां से इस योजना की शुरुआत की जाएगी। प्रदेश में स्थापित गौठान में और पशुपालकों से गोबर खरीदकर कर वर्मी कम्पोस्ट और अन्य उत्पाद तैयार किया जाएगा। इससे पशुपालकों को आर्थिक लाभ भी होगा।

अविवाहित दिवंगत सरकारी सेवकों के आश्रितों को भी अनुकंपा नियुक्ति
सामान्य प्रशासन विभाग ने अनुकंपा नियुक्ति के प्रावधानों में संशोधन किया है। यह फैसला लिया गया है कि यदि भाई-बहन अवयस्क हों, तो सरकार अविवाहित दिवंगत सरकारी सेवक के माता-पिता से अंतरिम आवेदन लेकर अवयस्क सदस्य के वयस्क होने पर उसे उसकी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर तृतीय अथवा चतुर्थ श्रेणी के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दे सकती है।

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