लॉकडाउन का असर:140 मिलों ने पोहा का उत्पादन 60% घटाया, क्योंकि 4 राज्यों ने बंद कर दी खरीदी, 3300 रुपए क्विंटल था पोहा, 250 रुपए तक गिरा रेट

भाटापारा में मिलें अब तीन-चार दिन ही चल पा रही हैंं, मंडी भी प्रभावित

प्रदेश में बढ़ते कोरोना संक्रमण व लॉकडाउन के चलते भाटापारा का पोहा उद्योग इन दिनों संकट के दौर से गुजर रहा है। महाराष्ट्र, मप्र, उत्तरप्रदेश, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश सहित अन्य और कई राज्यों में भाटापारा के पोहा की खरीदी की जाती रही है, लेकिन अब इन राज्यों ने कोरोना संकट व लॉकडाउन के चलते पोहा मिलर्स को आर्डर देना बंद कर दिया है। इससे यहां के मिलर्स ने पोहा का उत्पादन लगभग 60 प्रतिशत तक घटा दिया है। वर्तमान में भाटापारा में 130-140 पोहा मिले हैं। दरअसल इन राज्यों में संक्रमण लगातार बढ़ रहा है, जिससे वहीं भी लॉकडाउन के चलते राज्य सरकारों ने यहां का पोहा खरीदना लगभग बंद कर दिया है। अब हालात सामान्य होने तक भाटापारा के मिलर्स ने घरेलू मांग के अनुरूप ही पोहा उत्पादन का निर्णय लिया है। जानकारी के मुताबिक जो पोहा मिलें हफ्ते के 7 दिन चलती थीं तथा अवकाश वाले दिन मजदूरों को अवर टाइम करना पड़ता था, वे मिलें अब हफ्ते में बमुिश्कल 3-4 दिन ही चल रही हैं। मजदूर भी बेकार बैठे हैं। अब वे जो पोहा बना रहे है‌ं वे केवल घरेलू मांग के भरोसे है। इससे पोहा का उत्पादन तो घटा ही है, अब पोहा मिलें भी सप्ताह में तीन से चार दिन ही चलाई जा रही हैं। पोहे का जो रेट पिछले दो माह पूर्व 32-33 सौ रुपए प्रति क्विंटल था, उसमें भी 200 से 250 रुपए तक की गिरावट आ गई है।

इसके साथ ही पोहा मिलों में जिन मजदूरों यानी पोहा मिस्त्री से लेकर रेजा-हमाल को सप्ताह भर भरपूर काम के साथ ओवर टाइम मिलता था, अब उन्हें तीन चार दिन ही मुश्किल से काम मिल रहा है। इससे बड़ी संख्या में ऐसे मजदूरों के सामने रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई है। इधर लॉकडाउन के चलते कृषि उपज मंडी को भी बंद कर दिया गया है। इस कारण अब थोड़ा बहुत जो मिलें घरेलू मांग के लिए मिलर्स अगर चला भी रहे हैं उन्हें पोहा उत्पादन के लिए धान नहीं मिल पा रहा है। यानी पोहा उद्योग पर संकट के बादल छा गए हैं। एक और तथ्य-सावन भादो में झारखंड बिहार में बाबाधाम मेले के दौरान भी भारी मात्रा में पोहा की आपूर्ति यहां से की जाती थी, लेकिन लॉकडाउन के कारण अब यहां से भी पोहा की मांग ही नहीं आई क्योंकि धार्मिक स्थलों पर सामूहिक आयोजन भी बंद हैं। यानी घरेलू उत्पादन पर भी असर पड़ा है।

महामाया धान, जिससे पोहा बनता है, उसके रेट भी गिरे
पोहा की मांग कम होते ही मिलर्स ने इसका उत्पादन भी कम कर दिया तो इस असर से कृषि उपज मंडी भी अछूती नहीं रही। धान की कुल आवक का 80 फीसदी हिस्सा पोहा मिलें ही खरीदती रही हैं। पोहा बनाने वाला महामाया धान जो दो माह पूर्व 1500 से लेकर 1700 रुपए क्विंटल तक बिक रहा था, लॉकडाउन लगने से उसका भाव भी गिर गया है। 1300 से लेकर 1500 रुपए बिक रहा है, यानी इससे किसानों को भी सीधा नुकसान हो रहा है। इसके चलते मंडी में धान की आवक भी घटी है।

एसोसिएशन ने कहा- ये स्थिति भी कब तक रहेगी पता नहीं
पोहा मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश थारानी का इस संबंध में कहना है कि हां यह सही है कि महाराष्ट्र, एमपी, कर्नाटक, उप्र, आंध्र सहित कई अन्य राज्यों ने बढ़ते कोरोना संक्रमण के चलते हमारा पोहा खरीदना बंद कर दिया है जिससे मिलर्स ने 60 प्रतिशत उत्पादन कम कर दिया है। अब जो भी उत्पादन हो रहा है वह घरेलू मांग के अनुरूप ही हो रहा है, ये स्थिति भी कब तक कायम रहेगी कुछ कहा नहीं जा सकता क्योंकि बढ़ते संक्रमण के चलते बार-बार लॉकडाउन की स्थिति बनती नजर आ रही है।

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