बता दें कि इससे पहले भी स्वस्थ हुए मरीजों का प्लाज्मा लिया जा चुका है। चिकित्सकों ने बताया कि 200 मिलीलीटर दो बार यानी 400 मिलीलीटर प्लाज्मा लिया जा चुका है। तीसरी बार भी प्लाज्मा लिए जाने की तैयारी की जा चुकी है। एम्स प्रबंधन के अनुसार वर्तमान में आठ से नौ मरीज ऐसे हैं, जिन्हें प्लाज्मा थैरेपी के तहत इलाज की जरूरत पड़ सकती है। आने वाले समय में भी मरीज आएंगे। ऐसे में इस थैरेपी के तहत इलाज किया जाएगा।

कोरोना संक्रमित गर्भवती, बच्चे होते हैें भर्ती

प्रबंधन के अनुसार एम्स में गर्भवती, बच्चों और किसी अन्य बीमारी से पीड़ित होने के साथ कोरोना संक्रमित मरीज को इलाज के लिए लाया जाता है। इस तरह के मरीजों में प्रतिरोधक क्षमता कम होने की वजह से अन्य मरीजों के मुकाबले अधिक ध्यान देने की जरूरत होती है। एम्स में इसके लिए खास तरह के इंतजाम किए गए हैं। मरीजों का इलाज आइसीएमआर गाइड लाइन के अनुरूप किया जा रहा है।

क्या है प्लाज्मा थैरेपी

बीमारी से स्वस्थ हुए व्यक्ति के खून लेकर तरल पदार्थ या प्लाज्मा को रक्त कोशिकाओं से अलग किया जाता है। इसके बाद थैरेपी के माध्यम से इसे बीमार व्यक्ति के शरीर में डाला जाता है। यह कोशिकाओं में जाकर एंटीबॉडी डेवलप कर मरीज को ठीक करने में सहायक होता है।

इनका कहना है

प्लाज्मा थैरेपी के लिए जो मरीज स्वस्थ हो गए हैं उनका प्लाज्मा लिया जा रहा है। हमारे यहां संक्रमित चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ जो अब पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं वे सभी मरीजों के अपना प्लाज्मा देंगे।