राजनांदगांव : गौठानों में ग्रीष्मकालीन धान का पैरा दान करने का सिलसिला शुरू

छत्तीसगढ़ शासन की नरवा, गरूवा, घुरवा, बाड़ी योजना के तहत पशुओं के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु गांव में निर्मित गौठानों में पशुओं के लिए सूखे चारे की व्यवस्था मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ग्रामीण अंचल के किसानों ने पैरा दान करते रहे हैं। बीते खरीफ सीजन में राज्य के हजारों गौठानों के लिए ग्रामीणों पैरा दान किया था। ग्रीष्मकालीन धान की पैदावार के बाद भी किसानों ने गौठानों में पैरा दान के अभियान को जारी रखा है। ग्रीष्मकालीन धान की फसल का पैरा गौठानों में दान देने की शुरूआत राजनांदगांव जिले के ग्राम जंगलेशर से हुई है। जंगलेशर के किसानों ने ग्रीष्मकालीन धान की कटाई के बाद बेलर मशीन के माध्यम से 65 बंडल पैरा आदर्श गौठान मोखला को दान देने के लिए एकत्र किया है।
यहां यह उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शासन की सुराजी योजना के प्रमुख घटक गरूवा के अंतर्गत राज्य के लगभग 5 हजार 400 ग्राम पंचायतों में गौठान निर्माण की स्वीकृति दी जा चुकी है, जिसमें से लगभग2 हजार गौठान पूर्ण रूप से संचालित होने लगे हैं। संचालित गौठानों में आने वाले पशुओं के चारे-पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। गौठानों से ग्रामीणों का जुड़ाव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कृषि मंत्री श्री रविन्द्र चौबे भी ग्रामीणों एवं किसानों से भेंट-मुलाकात के दौरान उन्हें गौठान की प्रत्येक गतिविधि में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रेरित करते हैं। कृषि मंत्री का कहना है कि गौठान के मालिक गांव के ग्रामीण और किसान हैं। इसका संचालन ग्रामीणों की ही जिम्मेदारी है। गौठान में आने वाले पशुओं के लिए चारे-पानी का इंतजाम गौठान प्रबंधन समिति की जिम्मेदारी है। गांव में गौठानों के बनने के बाद से यहां आने वाले पशुओं के लिए पैरा दान की एक अच्छी परम्परा शुरू हुई है। ग्रामीण स्व-स्फूर्त रूप से गौठानों के लिए पैरा दान करने के साथ-साथ गौठान को आजीविका का केन्द्र बनाने में जुटे हैं।

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