राजनांदगांव : कोविड-19 वैश्विक महामारी की परिस्थिति को देखते हुए कलेक्टर के मार्गदर्शन में मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए की जा रही समुचित व्यवस्था

 विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा कोविड-19 को वैश्विक महामारी घोषित किया गया है। कलेक्टर श्री जयप्रकाश मौर्य के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग द्वारा महिलाओं के गर्भावस्था व प्रसव के दौरान निर्बाध रूप से स्वास्थ्य सेवायें उपलब्ध कराने के लिए मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं का समुचित व्यवस्थापन व क्रियान्वयन किया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश चौधरी के दिशा-निर्देश में गर्भावस्था के दौरान गंभीर खतरों वाली महिलाओं की पहचान, उपचार तथा प्रथम त्रैमास में पंजीयन, 4 ए.एन.सी. जांच तथा आयरन, एल्बेण्डाजॉल व कैल्शियम गोली का वितरण गर्भवती व शिशुवती महिलाओं को किया जा रहा है। टीकाकरण समय सारिणी अनुसार बच्चों का टीकाकरण एवं बच्चों में डायरिया न हो इस हेतु ओ.आर.एस. जिंक का वितरण टीकाकरण सत्रों में मैदानी स्तर के अमलों द्वारा निरंतर किया जा रहा है। आगामी 2 माह में जिन गर्भवती महिलाओं की अनुमानित प्रसव तिथि है उनके प्रसव के लिए स्वास्थ्य संस्थाओं का चिन्हांकन अनिवार्य रूप से किये जाने के लिए सभी स्तरों में निर्देशित किया गया है। गर्भवती महिलाओं या प्रसुताओं में बुखार, खांसी या सांस लेने में तकलीफ के साथ किसी भी प्रकार की जटिलता हो, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र के चिकित्सक से परामर्श लेकर उपचार लिए जाने की सलाह दी जाती है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. चौधरी ने बताया कि जिले में संचालित 14 संजीवनी 108 एम्बुलेंस एवं 23 महतारी एक्सप्रेस 102 के अतिरिक्त रिफरल हेतु वाहनों की व्यवस्था चिन्हांकित सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र स्तर पर की गई है। जिसके संबंधित खण्ड चिकित्सा अधिकारी को दूरभाष के माध्यम से संपर्क कर गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं हेतु नि:शुल्क परिवहन सुविधा का लाभ लिया जा सकता है। इस प्रकार से गंभीर प्रकरणों को समय पर अस्पताल व उच्च अस्पताल नि:शुल्क परिवहन के माध्यम से पहुॅचाया गया है।
अनिवार्य स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की असुविधा गर्भवती व शिशुवती महिलाओं को न हो, इसके लिए आवश्यक दवाईयों की सम्पूर्ण उपलब्धता विभाग द्वारा निरंतर की जा रही है। साथ ही अन्य प्रदेशों से आये गर्भवती महिलाओं का नियमित जांच के निर्देश मैदानी स्तर के अमलों को दिया गया है। टीकाकरण सत्रों में निर्धारित दिशा-निर्देश के अनुसार गंभीर बिमारी से बचने समय सारिणी अनुसार टीकाकरण का कार्य नवजात शिशुओं में किया जा रहा है। जन्म के समय बी.सी.जी., विटामिन-के तथा हेपेटाइटिस बर्थ डोज की उपलब्धता कोल्ड चेन पाइंट तक किया जाकर सेवायें प्रदाय की जा रही है। गर्भावस्था के दौरान मितानिनों के द्वारा गर्भवती महिलाओं को खान-पान एवं पोषण से संबंधित आवश्यक जानकारी प्रदाय की जा रही है। नवजात के घर मितानिन द्वारा प्रथम 42 दिन में सात निर्धारित गृह भेंट शत् प्रतिशत् किये जाने के निर्देश दिये गए हैं जिससे उक्त अवधि में मातृ एवं शिशु मृत्यु में कमी लाई जा सकेगी। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के सफल क्रियान्वयन हेतु विकासखण्ड स्तर पर मितानिन प्रशिक्षक तथा विकासखण्ड समन्वयक मितानिनों के माध्यम से नवजात शिशुओं की गृह भेंट के दौरान देखभाल की मॉनीटरिंग की जा रही है। गर्भवती एवं शिशुवती महिलाओं को किसी भी प्रकार की असुविधा होने पर सबंधित विकासखण्ड के खण्ड चिकित्सा अधिकारी विकासखण्ड मानपुर डॉ. मोहन टीकम 9406011341, मोहला डॉ. एस.आ. कोवाची 7587247508, अंबागढ़ चैकी डॉ. आर.आर. धु्रवे 9424134062, डोंगरगांव डॉ.रागिनी चंद्रे 9926946739, छुरिया डॉ.आर.के. पासी 9406012166, डोंगरगांव डॉ. बी.पी. एक्का 8982691671, घुमका डॉ. विजय खोब्रागढ़े 9981891479, खैरागढ़ डॉ. विवेक बिसेन 9827164303, छुईखदान डॉ. लीलादेवी रामटेके 7471199133 पर संपर्क किया जाकर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ लिया जा सकता है।
डॉ. चौधरी ने बताया किए जिला स्तर पर संचालित विशेष नवजात देखभाल इकाई के माध्यम से गंभीर खतरे वाले नवजात शिशुओं का उपचार का लाभ मिल रहा है।

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